11 अप्रैल 2025 को पुरी का चौघड़िया

शुक्रवार, 11 अप्रैल 2025, पुरी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 11 अप्रैल 2025 को पुरी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (03:22, 12 अप्रैल तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (15:10 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 10:13 से 11:47 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 18:03
रात 05:31 तक
तिथि
चतुर्दशी, 03:22 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 15:10 तक
हस्त
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:32 – 07:06सामान्य
लाभ07:06 – 08:39शुभ
अमृत08:39 – 10:13शुभ
काल10:13 – 11:47टालें
शुभ11:47 – 13:21शुभ
रोग13:21 – 14:55टालें
उद्वेग14:55 – 16:29टालें
चर16:29 – 18:03सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:03 – 19:29टालें
काल19:29 – 20:55टालें
लाभ20:55 – 22:21शुभ
उद्वेग22:21 – 23:47टालें
शुभ23:47 – 01:13शुभ
अमृत01:13 – 02:39शुभ
चर02:39 – 04:05सामान्य
रोग04:05 – 05:31टालें

11 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 03:22, 12 अप्रैल तक
पूर्णिमा 05:52, 13 अप्रैल तक
नक्षत्र
हस्त 18:07, 12 अप्रैल तक
योग
ध्रुव 19:45 तक
व्याघातअशुभ 20:40, 12 अप्रैल तक
करण
गर 14:10 तक
वणिज 03:22, 12 अप्रैल तक
विष्टि (भद्रा) 16:36, 12 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
16:48
चंद्रास्त
04:24
दिनमान
12h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:46
अभिजीत मुहूर्त
11:22 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
10:13 – 11:47
यमगंड
14:55 – 16:29
गुलिक काल
07:06 – 08:39

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3206:34दिन
बुध06:3407:37दिन
चंद्र07:3708:39दिन
शनि08:3909:42दिन
गुरु09:4210:45दिन
मंगल10:4511:47दिन
सूर्य11:4712:50दिन
शुक्र12:5013:53दिन
बुध13:5314:55दिन
चंद्र14:5515:58दिन
शनि15:5817:00दिन
गुरु17:0018:03दिन
मंगल18:0319:00रात
सूर्य19:0019:58रात
शुक्र19:5820:55रात
बुध20:5521:52रात
चंद्र21:5222:50रात
शनि22:5023:47रात
गुरु23:4700:44रात
मंगल00:4401:42रात
सूर्य01:4202:39रात
शुक्र02:3903:36रात
बुध03:3604:34रात
चंद्र04:3405:31रात

अयनांश 24.2101° (लाहिड़ी)। समय पुरी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।