20 अगस्त 2025 को पुष्कर का चौघड़िया

बुधवार, 20 अगस्त 2025, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 20 अगस्त 2025 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (13:59 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (00:27, 21 अग॰ तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 12:34 से 14:12 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 19:03
रात 06:06 तक
तिथि
द्वादशी, 13:59 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 00:27 तक
पुष्य
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:06 – 07:43शुभ
अमृत07:43 – 09:20शुभ
काल09:20 – 10:57टालें
शुभ10:57 – 12:34शुभ
रोग12:34 – 14:12टालें
उद्वेग14:12 – 15:49टालें
चर15:49 – 17:26सामान्य
लाभ17:26 – 19:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:03 – 20:26टालें
शुभ20:26 – 21:49शुभ
अमृत21:49 – 23:12शुभ
चर23:12 – 00:35सामान्य
रोग00:35 – 01:58टालें
काल01:58 – 03:20टालें
लाभ03:20 – 04:43शुभ
उद्वेग04:43 – 06:06टालें

20 अगस्त 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 13:59 तक
कृष्ण त्रयोदशी 12:45, 21 अग॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 00:27, 21 अग॰ तक
पुष्य 00:08, 22 अग॰ तक
योग
सिद्धि 18:13 तक
व्यतीपातअशुभ 16:14, 21 अग॰ तक
करण
तैतिल 13:59 तक
गर 01:19, 21 अग॰ तक
वणिज 12:45, 21 अग॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 18:35 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
02:47
चंद्रास्त
17:14
दिनमान
12h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:22
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 13:00 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:34 – 14:12
यमगंड
07:43 – 09:20
गुलिक काल
10:57 – 12:34

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0607:11दिन
चंद्र07:1108:15दिन
शनि08:1509:20दिन
गुरु09:2010:25दिन
मंगल10:2511:30दिन
सूर्य11:3012:34दिन
शुक्र12:3413:39दिन
बुध13:3914:44दिन
चंद्र14:4415:49दिन
शनि15:4916:54दिन
गुरु16:5417:58दिन
मंगल17:5819:03दिन
सूर्य19:0319:59रात
शुक्र19:5920:54रात
बुध20:5421:49रात
चंद्र21:4922:44रात
शनि22:4423:39रात
गुरु23:3900:35रात
मंगल00:3501:30रात
सूर्य01:3002:25रात
शुक्र02:2503:20रात
बुध03:2004:16रात
चंद्र04:1605:11रात
शनि05:1106:06रात

अयनांश 24.2151° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।