5 अक्टूबर 2025 को पुष्कर का चौघड़िया

रविवार, 5 अक्टूबर 2025, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 5 अक्टूबर 2025 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (15:04 तक), नक्षत्र शतभिषा (08:01 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:26 पर और सूर्यास्त 18:13 पर है। राहुकाल 16:45 से 18:13 तक है।

दिन और रात
दिन 06:26 – 18:13
रात 06:26 तक
तिथि
त्रयोदशी, 15:04 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 06:16 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:26 – 07:54टालें
चर07:54 – 09:23सामान्य
लाभ09:23 – 10:51शुभ
अमृत10:51 – 12:20शुभ
काल12:20 – 13:48टालें
शुभ13:48 – 15:16शुभ
रोग15:16 – 16:45टालें
उद्वेग16:45 – 18:13टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:13 – 19:45शुभ
अमृत19:45 – 21:17शुभ
चर21:17 – 22:48सामान्य
रोग22:48 – 00:20टालें
काल00:20 – 01:51टालें
लाभ01:51 – 03:23शुभ
उद्वेग03:23 – 04:54टालें
शुभ04:54 – 06:26शुभ

5 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 15:04 तक
शुक्ल चतुर्दशी 12:24, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 08:01 तक
पूर्वा भाद्रपद 06:16, 6 अक्टू॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 04:01, 7 अक्टू॰ तक
योग
गंडअशुभ 16:34 तक
वृद्धि 13:13, 6 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 15:04 तक
गर 01:48, 6 अक्टू॰ तक
वणिज 12:24, 6 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 00:45, 6 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:26
सूर्यास्त
18:13
चंद्रोदय
17:04
चंद्रास्त
04:14
दिनमान
11h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:48 – 05:37
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
16:45 – 18:13
यमगंड
12:20 – 13:48
गुलिक काल
15:16 – 16:45

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2607:25दिन
शुक्र07:2508:24दिन
बुध08:2409:23दिन
चंद्र09:2310:22दिन
शनि10:2211:21दिन
गुरु11:2112:20दिन
मंगल12:2013:19दिन
सूर्य13:1914:17दिन
शुक्र14:1715:16दिन
बुध15:1616:15दिन
चंद्र16:1517:14दिन
शनि17:1418:13दिन
गुरु18:1319:15रात
मंगल19:1520:16रात
सूर्य20:1621:17रात
शुक्र21:1722:18रात
बुध22:1823:19रात
चंद्र23:1900:20रात
शनि00:2001:21रात
गुरु01:2102:22रात
मंगल02:2203:23रात
सूर्य03:2304:24रात
शुक्र04:2405:25रात
बुध05:2506:26रात

अयनांश 24.2169° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।