11 मार्च 2026 को पुष्कर का चौघड़िया

बुधवार, 11 मार्च 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 11 मार्च 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (04:19, 12 मार्च तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (22:00 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:45 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 12:42 से 14:11 तक है।

दिन और रात
दिन 06:45 – 18:38
रात 06:44 तक
तिथि
अष्टमी, 04:19 तक
नवमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 22:00 तक
मूल
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:45 – 08:14शुभ
अमृत08:14 – 09:43शुभ
काल09:43 – 11:12टालें
शुभ11:12 – 12:42शुभ
रोग12:42 – 14:11टालें
उद्वेग14:11 – 15:40टालें
चर15:40 – 17:09सामान्य
लाभ17:09 – 18:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:38 – 20:09टालें
शुभ20:09 – 21:39शुभ
अमृत21:39 – 23:10शुभ
चर23:10 – 00:41सामान्य
रोग00:41 – 02:12टालें
काल02:12 – 03:43टालें
लाभ03:43 – 05:13शुभ
उद्वेग05:13 – 06:44टालें

11 मार्च 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 04:19, 12 मार्च तक
कृष्ण नवमी 06:29, 13 मार्च तक
नक्षत्र
मूल 00:43, 13 मार्च तक
योग
वज्रअशुभ 09:12 तक
सिद्धि 09:58, 12 मार्च तक
करण
बालव 15:08 तक
कौलव 04:19, 12 मार्च तक
तैतिल 17:27, 12 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:45
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
01:06
चंद्रास्त
11:23
दिनमान
11h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 05:57
अभिजीत मुहूर्त
12:18 – 13:05 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:42 – 14:11
यमगंड
08:14 – 09:43
गुलिक काल
11:12 – 12:42

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4507:45दिन
चंद्र07:4508:44दिन
शनि08:4409:43दिन
गुरु09:4310:43दिन
मंगल10:4311:42दिन
सूर्य11:4212:42दिन
शुक्र12:4213:41दिन
बुध13:4114:40दिन
चंद्र14:4015:40दिन
शनि15:4016:39दिन
गुरु16:3917:38दिन
मंगल17:3818:38दिन
सूर्य18:3819:38रात
शुक्र19:3820:39रात
बुध20:3921:39रात
चंद्र21:3922:40रात
शनि22:4023:40रात
गुरु23:4000:41रात
मंगल00:4101:42रात
सूर्य01:4202:42रात
शुक्र02:4203:43रात
बुध03:4304:43रात
चंद्र04:4305:44रात
शनि05:4406:44रात

अयनांश 24.2229° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।