4 अक्टूबर 2026 को पुष्कर का चौघड़िया

रविवार, 4 अक्टूबर 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (03:54, 5 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पुनर्वसु (00:14, 5 अक्टू॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:25 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 16:46 से 18:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:25 – 18:15
रात 06:25 तक
तिथि
नवमी, 03:54 तक
दशमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 00:14 तक
पुष्य
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:25 – 07:54टालें
चर07:54 – 09:22सामान्य
लाभ09:22 – 10:51शुभ
अमृत10:51 – 12:20शुभ
काल12:20 – 13:49टालें
शुभ13:49 – 15:17शुभ
रोग15:17 – 16:46टालें
उद्वेग16:46 – 18:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:15 – 19:46शुभ
अमृत19:46 – 21:17शुभ
चर21:17 – 22:49सामान्य
रोग22:49 – 00:20टालें
काल00:20 – 01:51टालें
लाभ01:51 – 03:23शुभ
उद्वेग03:23 – 04:54टालें
शुभ04:54 – 06:25शुभ

4 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण नवमी 03:54, 5 अक्टू॰ तक
कृष्ण दशमी 02:07, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 00:14, 5 अक्टू॰ तक
पुष्य 23:09, 5 अक्टू॰ तक
योग
परिघअशुभ 12:32 तक
शिव 09:51, 5 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 16:51 तक
गर 03:54, 5 अक्टू॰ तक
वणिज 14:59, 5 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 18:32 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:25
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
14:07
दिनमान
11h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:48 – 05:36
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
16:46 – 18:15
यमगंड
12:20 – 13:49
गुलिक काल
15:17 – 16:46

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2507:24दिन
शुक्र07:2408:23दिन
बुध08:2309:22दिन
चंद्र09:2210:22दिन
शनि10:2211:21दिन
गुरु11:2112:20दिन
मंगल12:2013:19दिन
सूर्य13:1914:18दिन
शुक्र14:1815:17दिन
बुध15:1716:16दिन
चंद्र16:1617:16दिन
शनि17:1618:15दिन
गुरु18:1519:16रात
मंगल19:1620:17रात
सूर्य20:1721:17रात
शुक्र21:1722:18रात
बुध22:1823:19रात
चंद्र23:1900:20रात
शनि00:2001:21रात
गुरु01:2102:22रात
मंगल02:2203:23रात
सूर्य03:2304:24रात
शुक्र04:2405:25रात
बुध05:2506:25रात

अयनांश 24.2308° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।