1 अप्रैल 2025 को रांची का चौघड़िया

मंगलवार, 1 अप्रैल 2025, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 1 अप्रैल 2025 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (05:42 तक), नक्षत्र भरणी (11:06 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 14:58 से 16:31 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 18:04
रात 05:40 तक
तिथि
चतुर्थी, 02:32 तक
पंचमी
नक्षत्र
भरणी, 11:06 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:41 – 07:14टालें
उद्वेग07:14 – 08:46टालें
चर08:46 – 10:19सामान्य
लाभ10:19 – 11:52शुभ
अमृत11:52 – 13:25शुभ
काल13:25 – 14:58टालें
शुभ14:58 – 16:31शुभ
रोग16:31 – 18:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:04 – 19:31टालें
लाभ19:31 – 20:58शुभ
उद्वेग20:58 – 22:25टालें
शुभ22:25 – 23:52शुभ
अमृत23:52 – 01:19शुभ
चर01:19 – 02:46सामान्य
रोग02:46 – 04:13टालें
काल04:13 – 05:40टालें

1 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 05:42 तक
शुक्ल चतुर्थी 02:32, 2 अप्रैल तक
शुक्ल पंचमी 23:50, 2 अप्रैल तक
नक्षत्र
भरणी 11:06 तक
कृत्तिका 08:49, 2 अप्रैल तक
योग
विष्कंभअशुभ 09:48 तक
प्रीति 06:07, 2 अप्रैल तक
करण
गर 05:42 तक
वणिज 16:05 तक
विष्टि (भद्रा) 02:32, 2 अप्रैल तक
बव 13:07, 2 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मेष 16:30 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
07:31
चंद्रास्त
21:26
दिनमान
12h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:54
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:17

अशुभ समय

राहुकाल
14:58 – 16:31
यमगंड
08:46 – 10:19
गुलिक काल
11:52 – 13:25

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:4106:43दिन
सूर्य06:4307:45दिन
शुक्र07:4508:46दिन
बुध08:4609:48दिन
चंद्र09:4810:50दिन
शनि10:5011:52दिन
गुरु11:5212:54दिन
मंगल12:5413:56दिन
सूर्य13:5614:58दिन
शुक्र14:5816:00दिन
बुध16:0017:02दिन
चंद्र17:0218:04दिन
शनि18:0419:02रात
गुरु19:0220:00रात
मंगल20:0020:58रात
सूर्य20:5821:56रात
शुक्र21:5622:54रात
बुध22:5423:52रात
चंद्र23:5200:50रात
शनि00:5001:48रात
गुरु01:4802:46रात
मंगल02:4603:44रात
सूर्य03:4404:42रात
शुक्र04:4205:40रात

अयनांश 24.2097° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।