17 नवंबर 2027 को सिलचर का चौघड़िया

बुधवार, 17 नवंबर 2027, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 17 नवंबर 2027 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (01:35, 18 नव॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (03:18, 18 नव॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 16:31 पर है। राहुकाल 11:03 से 12:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 16:31
रात 05:36 तक
तिथि
चतुर्थी, 01:35 तक
पंचमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 03:18 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:36 – 06:57शुभ
अमृत06:57 – 08:19शुभ
काल08:19 – 09:41टालें
शुभ09:41 – 11:03शुभ
रोग11:03 – 12:25टालें
उद्वेग12:25 – 13:47टालें
चर13:47 – 15:09सामान्य
लाभ15:09 – 16:31शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:31 – 18:09टालें
शुभ18:09 – 19:47शुभ
अमृत19:47 – 21:25शुभ
चर21:25 – 23:03सामान्य
रोग23:03 – 00:42टालें
काल00:42 – 02:20टालें
लाभ02:20 – 03:58शुभ
उद्वेग03:58 – 05:36टालें

17 नवंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 01:35, 18 नव॰ तक
कृष्ण पंचमी 23:27, 18 नव॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 03:18, 18 नव॰ तक
पुनर्वसु 01:52, 19 नव॰ तक
योग
सिद्ध 09:48 तक
साध्य 06:53, 18 नव॰ तक
करण
बव 14:39 तक
बालव 01:35, 18 नव॰ तक
कौलव 12:31, 18 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
16:31
चंद्रोदय
19:26
चंद्रास्त
08:40
दिनमान
10h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
10:41 – 11:25 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:03 – 12:25
यमगंड
06:57 – 08:19
गुलिक काल
09:41 – 11:03

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3606:30दिन
चंद्र06:3007:25दिन
शनि07:2508:19दिन
गुरु08:1909:14दिन
मंगल09:1410:08दिन
सूर्य10:0811:03दिन
शुक्र11:0311:58दिन
बुध11:5812:52दिन
चंद्र12:5213:47दिन
शनि13:4714:41दिन
गुरु14:4115:36दिन
मंगल15:3616:31दिन
सूर्य16:3117:36रात
शुक्र17:3618:41रात
बुध18:4119:47रात
चंद्र19:4720:52रात
शनि20:5221:58रात
गुरु21:5823:03रात
मंगल23:0300:09रात
सूर्य00:0901:14रात
शुक्र01:1402:20रात
बुध02:2003:25रात
चंद्र03:2504:31रात
शनि04:3105:36रात

अयनांश 24.2465° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।