8 अक्टूबर 2025 को सिलीगुड़ी का चौघड़िया

बुधवार, 8 अक्टूबर 2025, सिलीगुड़ी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 8 अक्टूबर 2025 को सिलीगुड़ी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (05:53 तक), नक्षत्र अश्विनी (22:44 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 17:15 पर है। राहुकाल 11:23 से 12:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 17:15
रात 05:32 तक
तिथि
द्वितीया, 02:23 तक
तृतीया
नक्षत्र
अश्विनी, 22:44 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:32 – 07:00शुभ
अमृत07:00 – 08:27शुभ
काल08:27 – 09:55टालें
शुभ09:55 – 11:23शुभ
रोग11:23 – 12:51टालें
उद्वेग12:51 – 14:19टालें
चर14:19 – 15:47सामान्य
लाभ15:47 – 17:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:15 – 18:47टालें
शुभ18:47 – 20:19शुभ
अमृत20:19 – 21:51शुभ
चर21:51 – 23:24सामान्य
रोग23:24 – 00:56टालें
काल00:56 – 02:28टालें
लाभ02:28 – 04:00शुभ
उद्वेग04:00 – 05:32टालें

8 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 05:53 तक
कृष्ण द्वितीया 02:23, 9 अक्टू॰ तक
कृष्ण तृतीया 22:54, 9 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
भरणी 20:02, 9 अक्टू॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 05:35 तक
हर्षण 01:32, 9 अक्टू॰ तक
वज्रअशुभ 21:32, 9 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 05:53 तक
तैतिल 16:08 तक
गर 02:23, 9 अक्टू॰ तक
वणिज 12:38, 9 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
17:15
चंद्रोदय
17:56
चंद्रास्त
06:32
दिनमान
11h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:00 – 11:47 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:23 – 12:51
यमगंड
07:00 – 08:27
गुलिक काल
09:55 – 11:23

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3206:30दिन
चंद्र06:3007:29दिन
शनि07:2908:27दिन
गुरु08:2709:26दिन
मंगल09:2610:25दिन
सूर्य10:2511:23दिन
शुक्र11:2312:22दिन
बुध12:2213:20दिन
चंद्र13:2014:19दिन
शनि14:1915:18दिन
गुरु15:1816:16दिन
मंगल16:1617:15दिन
सूर्य17:1518:16रात
शुक्र18:1619:18रात
बुध19:1820:19रात
चंद्र20:1921:21रात
शनि21:2122:22रात
गुरु22:2223:24रात
मंगल23:2400:25रात
सूर्य00:2501:26रात
शुक्र01:2602:28रात
बुध02:2803:29रात
चंद्र03:2904:31रात
शनि04:3105:32रात

अयनांश 24.2170° (लाहिड़ी)। समय सिलीगुड़ी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।