4 सितंबर 2025 को श्रीनगर का चौघड़िया

गुरुवार, 4 सितंबर 2025, श्रीनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 4 सितंबर 2025 को श्रीनगर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (04:08, 5 सित॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (23:44 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:52 पर है। राहुकाल 14:05 से 15:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 18:52
रात 06:07 तक
तिथि
द्वादशी, 04:08 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 23:44 तक
श्रवण
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:06 – 07:42शुभ
रोग07:42 – 09:17टालें
उद्वेग09:17 – 10:53टालें
चर10:53 – 12:29सामान्य
लाभ12:29 – 14:05शुभ
अमृत14:05 – 15:41शुभ
काल15:41 – 17:16टालें
शुभ17:16 – 18:52शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:52 – 20:17शुभ
चर20:17 – 21:41सामान्य
रोग21:41 – 23:05टालें
काल23:05 – 00:29टालें
लाभ00:29 – 01:54शुभ
उद्वेग01:54 – 03:18टालें
शुभ03:18 – 04:42शुभ
अमृत04:42 – 06:07शुभ

4 सितंबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 04:08, 5 सित॰ तक
शुक्ल त्रयोदशी 03:13, 6 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 23:38, 5 सित॰ तक
योग
सौभाग्य 15:21 तक
शोभन 13:52, 5 सित॰ तक
करण
बव 16:20 तक
बालव 04:08, 5 सित॰ तक
कौलव 15:46, 5 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:52
चंद्रोदय
17:00
चंद्रास्त
02:00
दिनमान
12h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:36 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
14:05 – 15:41
यमगंड
06:06 – 07:42
गुलिक काल
09:17 – 10:53

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0607:10दिन
मंगल07:1008:14दिन
सूर्य08:1409:17दिन
शुक्र09:1710:21दिन
बुध10:2111:25दिन
चंद्र11:2512:29दिन
शनि12:2913:33दिन
गुरु13:3314:37दिन
मंगल14:3715:41दिन
सूर्य15:4116:44दिन
शुक्र16:4417:48दिन
बुध17:4818:52दिन
चंद्र18:5219:48रात
शनि19:4820:45रात
गुरु20:4521:41रात
मंगल21:4122:37रात
सूर्य22:3723:33रात
शुक्र23:3300:29रात
बुध00:2901:26रात
चंद्र01:2602:22रात
शनि02:2203:18रात
गुरु03:1804:14रात
मंगल04:1405:10रात
सूर्य05:1006:07रात

अयनांश 24.2157° (लाहिड़ी)। समय श्रीनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।