23 अप्रैल 2027 को श्रीनगर का चौघड़िया

शुक्रवार, 23 अप्रैल 2027, श्रीनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 23 अप्रैल 2027 को श्रीनगर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (04:21, 24 अप्रैल तक), नक्षत्र अनुराधा (06:57, 24 अप्रैल तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:50 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 10:49 से 12:29 तक है।

दिन और रात
दिन 05:50 – 19:08
रात 05:49 तक
तिथि
तृतीया, 04:21 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
अनुराधा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अप्रैल 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:50 – 07:30सामान्य
लाभ07:30 – 09:10शुभ
अमृत09:10 – 10:49शुभ
काल10:49 – 12:29टालें
शुभ12:29 – 14:09शुभ
रोग14:09 – 15:48टालें
उद्वेग15:48 – 17:28टालें
चर17:28 – 19:08सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:08 – 20:28टालें
काल20:28 – 21:48टालें
लाभ21:48 – 23:08शुभ
उद्वेग23:08 – 00:28टालें
शुभ00:28 – 01:49शुभ
अमृत01:49 – 03:09शुभ
चर03:09 – 04:29सामान्य
रोग04:29 – 05:49टालें

23 अप्रैल 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 04:21, 24 अप्रैल तक
कृष्ण चतुर्थी 05:42, 25 अप्रैल तक
नक्षत्र
अनुराधा 06:57, 24 अप्रैल तक
योग
व्यतीपातअशुभ 14:13 तक
वरीयान 13:58, 24 अप्रैल तक
करण
वणिज 15:54 तक
विष्टि (भद्रा) 04:21, 24 अप्रैल तक
बव 16:57, 24 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
21:56
चंद्रास्त
06:53
दिनमान
13h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
10:49 – 12:29
यमगंड
15:48 – 17:28
गुलिक काल
07:30 – 09:10

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5006:57दिन
बुध06:5708:03दिन
चंद्र08:0309:10दिन
शनि09:1010:16दिन
गुरु10:1611:23दिन
मंगल11:2312:29दिन
सूर्य12:2913:35दिन
शुक्र13:3514:42दिन
बुध14:4215:48दिन
चंद्र15:4816:55दिन
शनि16:5518:01दिन
गुरु18:0119:08दिन
मंगल19:0820:01रात
सूर्य20:0120:54रात
शुक्र20:5421:48रात
बुध21:4822:41रात
चंद्र22:4123:35रात
शनि23:3500:28रात
गुरु00:2801:22रात
मंगल01:2202:15रात
सूर्य02:1503:09रात
शुक्र03:0904:02रात
बुध04:0204:56रात
चंद्र04:5605:49रात

अयनांश 24.2385° (लाहिड़ी)। समय श्रीनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।