31 दिसंबर 2027 को श्रीनगर का चौघड़िया

शुक्रवार, 31 दिसंबर 2027, श्रीनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 31 दिसंबर 2027 को श्रीनगर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (08:12 तक), नक्षत्र श्रवण (13:06 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 07:36 पर और सूर्यास्त 17:31 पर है। राहुकाल 11:19 से 12:33 तक है।

दिन और रात
दिन 07:36 – 17:31
रात 07:36 तक
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
श्रवण, 13:06 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:36 – 08:50सामान्य
लाभ08:50 – 10:04शुभ
अमृत10:04 – 11:19शुभ
काल11:19 – 12:33टालें
शुभ12:33 – 13:47शुभ
रोग13:47 – 15:02टालें
उद्वेग15:02 – 16:16टालें
चर16:16 – 17:31सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:31 – 19:16टालें
काल19:16 – 21:02टालें
लाभ21:02 – 22:48शुभ
उद्वेग22:48 – 00:33टालें
शुभ00:33 – 02:19शुभ
अमृत02:19 – 04:04शुभ
चर04:04 – 05:50सामान्य
रोग05:50 – 07:36टालें

31 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 08:12 तक
शुक्ल चतुर्थी 10:55, 1 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 13:06 तक
धनिष्ठा 16:15, 1 जन॰ तक
योग
हर्षण 09:44 तक
वज्रअशुभ 10:43, 1 जन॰ तक
करण
गर 08:12 तक
वणिज 21:33 तक
विष्टि (भद्रा) 10:55, 1 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 02:40, 1 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:36
सूर्यास्त
17:31
चंद्रोदय
09:47
चंद्रास्त
20:48
दिनमान
9h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:43 – 06:39
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
11:19 – 12:33
यमगंड
15:02 – 16:16
गुलिक काल
08:50 – 10:04

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:3608:25दिन
बुध08:2509:15दिन
चंद्र09:1510:04दिन
शनि10:0410:54दिन
गुरु10:5411:43दिन
मंगल11:4312:33दिन
सूर्य12:3313:23दिन
शुक्र13:2314:12दिन
बुध14:1215:02दिन
चंद्र15:0215:51दिन
शनि15:5116:41दिन
गुरु16:4117:31दिन
मंगल17:3118:41रात
सूर्य18:4119:51रात
शुक्र19:5121:02रात
बुध21:0222:12रात
चंद्र22:1223:23रात
शनि23:2300:33रात
गुरु00:3301:44रात
मंगल01:4402:54रात
सूर्य02:5404:04रात
शुक्र04:0405:15रात
बुध05:1506:25रात
चंद्र06:2507:36रात

अयनांश 24.2482° (लाहिड़ी)। समय श्रीनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।