11 अप्रैल 2025 को वाराणसी का चौघड़िया

शुक्रवार, 11 अप्रैल 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 11 अप्रैल 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (03:22, 12 अप्रैल तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (15:10 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 10:24 से 11:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 18:19
रात 05:38 तक
तिथि
चतुर्दशी, 03:22 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 15:10 तक
हस्त
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:39 – 07:14सामान्य
लाभ07:14 – 08:49शुभ
अमृत08:49 – 10:24शुभ
काल10:24 – 11:59टालें
शुभ11:59 – 13:34शुभ
रोग13:34 – 15:09टालें
उद्वेग15:09 – 16:44टालें
चर16:44 – 18:19सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:19 – 19:43टालें
काल19:43 – 21:08टालें
लाभ21:08 – 22:33शुभ
उद्वेग22:33 – 23:58टालें
शुभ23:58 – 01:23शुभ
अमृत01:23 – 02:48शुभ
चर02:48 – 04:13सामान्य
रोग04:13 – 05:38टालें

11 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 03:22, 12 अप्रैल तक
पूर्णिमा 05:52, 13 अप्रैल तक
नक्षत्र
हस्त 18:07, 12 अप्रैल तक
योग
ध्रुव 19:45 तक
व्याघातअशुभ 20:40, 12 अप्रैल तक
करण
गर 14:10 तक
वणिज 03:22, 12 अप्रैल तक
विष्टि (भद्रा) 16:36, 12 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
17:01
चंद्रास्त
04:36
दिनमान
12h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:54
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
10:24 – 11:59
यमगंड
15:09 – 16:44
गुलिक काल
07:14 – 08:49

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3906:42दिन
बुध06:4207:46दिन
चंद्र07:4608:49दिन
शनि08:4909:52दिन
गुरु09:5210:56दिन
मंगल10:5611:59दिन
सूर्य11:5913:02दिन
शुक्र13:0214:05दिन
बुध14:0515:09दिन
चंद्र15:0916:12दिन
शनि16:1217:15दिन
गुरु17:1518:19दिन
मंगल18:1919:15रात
सूर्य19:1520:12रात
शुक्र20:1221:08रात
बुध21:0822:05रात
चंद्र22:0523:02रात
शनि23:0223:58रात
गुरु23:5800:55रात
मंगल00:5501:52रात
सूर्य01:5202:48रात
शुक्र02:4803:45रात
बुध03:4504:41रात
चंद्र04:4105:38रात

अयनांश 24.2101° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।