29 अप्रैल 2025 को वाराणसी का चौघड़िया

मंगलवार, 29 अप्रैल 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 29 अप्रैल 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (17:31 तक), नक्षत्र कृत्तिका (18:47 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 15:11 से 16:49 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 18:27
रात 05:22 तक
तिथि
द्वितीया, 17:31 तक
तृतीया
नक्षत्र
कृत्तिका, 18:47 तक
रोहिणी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:23 – 07:01टालें
उद्वेग07:01 – 08:39टालें
चर08:39 – 10:17सामान्य
लाभ10:17 – 11:55शुभ
अमृत11:55 – 13:33शुभ
काल13:33 – 15:11टालें
शुभ15:11 – 16:49शुभ
रोग16:49 – 18:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:27 – 19:49टालें
लाभ19:49 – 21:11शुभ
उद्वेग21:11 – 22:33टालें
शुभ22:33 – 23:55शुभ
अमृत23:55 – 01:17शुभ
चर01:17 – 02:39सामान्य
रोग02:39 – 04:00टालें
काल04:00 – 05:22टालें

29 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 17:31 तक
शुक्ल तृतीया 14:12, 30 अप्रैल तक
नक्षत्र
रोहिणी 16:18, 30 अप्रैल तक
योग
सौभाग्य 15:53 तक
शोभन 12:01, 30 अप्रैल तक
करण
बालव 07:19 तक
कौलव 17:31 तक
तैतिल 03:48, 30 अप्रैल तक
गर 14:12, 30 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
06:13
चंद्रास्त
20:28
दिनमान
13h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:39
अभिजीत मुहूर्त
11:29 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
15:11 – 16:49
यमगंड
08:39 – 10:17
गुलिक काल
11:55 – 13:33

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:2306:28दिन
सूर्य06:2807:34दिन
शुक्र07:3408:39दिन
बुध08:3909:44दिन
चंद्र09:4410:50दिन
शनि10:5011:55दिन
गुरु11:5513:00दिन
मंगल13:0014:06दिन
सूर्य14:0615:11दिन
शुक्र15:1116:16दिन
बुध16:1617:22दिन
चंद्र17:2218:27दिन
शनि18:2719:22रात
गुरु19:2220:16रात
मंगल20:1621:11रात
सूर्य21:1122:06रात
शुक्र22:0623:00रात
बुध23:0023:55रात
चंद्र23:5500:49रात
शनि00:4901:44रात
गुरु01:4402:39रात
मंगल02:3903:33रात
सूर्य03:3304:28रात
शुक्र04:2805:22रात

अयनांश 24.2108° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।