26 मई 2025 को वाराणसी का चौघड़िया

सोमवार, 26 मई 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 26 मई 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (12:12 तक), नक्षत्र भरणी (08:23 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:08 पर और सूर्यास्त 18:41 पर है। राहुकाल 06:50 से 08:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:08 – 18:41
रात 05:08 तक
तिथि
चतुर्दशी, 12:12 तक
अमावस्या
नक्षत्र
भरणी, 08:23 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:08 – 06:50शुभ
काल06:50 – 08:32टालें
शुभ08:32 – 10:13शुभ
रोग10:13 – 11:55टालें
उद्वेग11:55 – 13:36टालें
चर13:36 – 15:18सामान्य
लाभ15:18 – 16:59शुभ
अमृत16:59 – 18:41शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:41 – 19:59सामान्य
रोग19:59 – 21:18टालें
काल21:18 – 22:36टालें
लाभ22:36 – 23:55शुभ
उद्वेग23:55 – 01:13टालें
शुभ01:13 – 02:31शुभ
अमृत02:31 – 03:50शुभ
चर03:50 – 05:08सामान्य

26 मई 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 12:12 तक
अमावस्या 08:32, 27 मई तक
नक्षत्र
भरणी 08:23 तक
कृत्तिका 05:32, 27 मई तक
योग
शोभन 07:01 तक
अतिगंडअशुभ 02:54, 27 मई तक
सुकर्मा 22:54, 27 मई तक
करण
शकुनि 12:12 तक
चतुष्पद 22:21 तक
नाग 08:32, 27 मई तक
चंद्र राशि
मेष 13:40 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:08
सूर्यास्त
18:41
चंद्रोदय
03:59
चंद्रास्त
18:02
दिनमान
13h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:45 – 04:27
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
06:50 – 08:32
यमगंड
10:13 – 11:55
गुलिक काल
13:36 – 15:18

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:0806:16दिन
शनि06:1607:24दिन
गुरु07:2408:32दिन
मंगल08:3209:39दिन
सूर्य09:3910:47दिन
शुक्र10:4711:55दिन
बुध11:5513:02दिन
चंद्र13:0214:10दिन
शनि14:1015:18दिन
गुरु15:1816:26दिन
मंगल16:2617:33दिन
सूर्य17:3318:41दिन
शुक्र18:4119:33रात
बुध19:3320:26रात
चंद्र20:2621:18रात
शनि21:1822:10रात
गुरु22:1023:02रात
मंगल23:0223:55रात
सूर्य23:5500:47रात
शुक्र00:4701:39रात
बुध01:3902:31रात
चंद्र02:3103:24रात
शनि03:2404:16रात
गुरु04:1605:08रात

अयनांश 24.2118° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।