25 जून 2025 को वाराणसी का चौघड़िया

बुधवार, 25 जून 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 25 जून 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (16:01 तक), नक्षत्र मृगशिरा (10:40 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:09 पर और सूर्यास्त 18:52 पर है। राहुकाल 12:00 से 13:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:09 – 18:52
रात 05:09 तक
तिथि
अमावस्या, 16:01 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मृगशिरा, 10:40 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 जून 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:09 – 06:52शुभ
अमृत06:52 – 08:35शुभ
काल08:35 – 10:17टालें
शुभ10:17 – 12:00शुभ
रोग12:00 – 13:43टालें
उद्वेग13:43 – 15:26टालें
चर15:26 – 17:09सामान्य
लाभ17:09 – 18:52शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:52 – 20:09टालें
शुभ20:09 – 21:26शुभ
अमृत21:26 – 22:43शुभ
चर22:43 – 00:00सामान्य
रोग00:00 – 01:18टालें
काल01:18 – 02:35टालें
लाभ02:35 – 03:52शुभ
उद्वेग03:52 – 05:09टालें

25 जून 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 16:01 तक
शुक्ल प्रतिपदा 13:25, 26 जून तक
नक्षत्र
आर्द्रा 08:46, 26 जून तक
योग
गंडअशुभ 06:00 तक
वृद्धि 02:39, 26 जून तक
ध्रुव 23:40, 26 जून तक
करण
चतुष्पद 05:28 तक
नाग 16:01 तक
किंस्तुघ्न 02:40, 26 जून तक
बव 13:25, 26 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:09
सूर्यास्त
18:52
चंद्रोदय
04:33
चंद्रास्त
19:07
दिनमान
13h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:28
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:28 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:00 – 13:43
यमगंड
06:52 – 08:35
गुलिक काल
10:17 – 12:00

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:0906:17दिन
चंद्र06:1707:26दिन
शनि07:2608:35दिन
गुरु08:3509:43दिन
मंगल09:4310:52दिन
सूर्य10:5212:00दिन
शुक्र12:0013:09दिन
बुध13:0914:17दिन
चंद्र14:1715:26दिन
शनि15:2616:34दिन
गुरु16:3417:43दिन
मंगल17:4318:52दिन
सूर्य18:5219:43रात
शुक्र19:4320:35रात
बुध20:3521:26रात
चंद्र21:2622:17रात
शनि22:1723:09रात
गुरु23:0900:00रात
मंगल00:0000:52रात
सूर्य00:5201:43रात
शुक्र01:4302:35रात
बुध02:3503:26रात
चंद्र03:2604:18रात
शनि04:1805:09रात

अयनांश 24.2130° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।