17 जुलाई 2025 को वाराणसी का चौघड़िया

गुरुवार, 17 जुलाई 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 17 जुलाई 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (19:09 तक), नक्षत्र रेवती (03:39, 18 जुल॰ तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:18 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 13:45 से 15:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:18 – 18:50
रात 05:18 तक
तिथि
सप्तमी, 19:09 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रेवती, 03:39 तक
अश्विनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:18 – 06:59शुभ
रोग06:59 – 08:41टालें
उद्वेग08:41 – 10:22टालें
चर10:22 – 12:04सामान्य
लाभ12:04 – 13:45शुभ
अमृत13:45 – 15:27शुभ
काल15:27 – 17:08टालें
शुभ17:08 – 18:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:50 – 20:08शुभ
चर20:08 – 21:27सामान्य
रोग21:27 – 22:45टालें
काल22:45 – 00:04टालें
लाभ00:04 – 01:22शुभ
उद्वेग01:22 – 02:41टालें
शुभ02:41 – 03:59शुभ
अमृत03:59 – 05:18शुभ

17 जुलाई 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 19:09 तक
कृष्ण अष्टमी 17:02, 18 जुल॰ तक
नक्षत्र
रेवती 03:39, 18 जुल॰ तक
अश्विनी 02:14, 19 जुल॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 09:28 तक
सुकर्मा 06:48, 18 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:07 तक
बव 19:09 तक
बालव 06:07, 18 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मीन 03:39, 18 जुल॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:18
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
23:10
चंद्रास्त
11:21
दिनमान
13h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:36
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
13:45 – 15:27
यमगंड
05:18 – 06:59
गुलिक काल
08:41 – 10:22

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1806:25दिन
मंगल06:2507:33दिन
सूर्य07:3308:41दिन
शुक्र08:4109:48दिन
बुध09:4810:56दिन
चंद्र10:5612:04दिन
शनि12:0413:11दिन
गुरु13:1114:19दिन
मंगल14:1915:27दिन
सूर्य15:2716:34दिन
शुक्र16:3417:42दिन
बुध17:4218:50दिन
चंद्र18:5019:42रात
शनि19:4220:35रात
गुरु20:3521:27रात
मंगल21:2722:19रात
सूर्य22:1923:12रात
शुक्र23:1200:04रात
बुध00:0400:56रात
चंद्र00:5601:49रात
शनि01:4902:41रात
गुरु02:4103:33रात
मंगल03:3304:26रात
सूर्य04:2605:18रात

अयनांश 24.2138° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।