10 सितंबर 2025 को वाराणसी का चौघड़िया

बुधवार, 10 सितंबर 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 10 सितंबर 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (15:38 तक), नक्षत्र रेवती (16:03 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 18:07 पर है। राहुकाल 11:54 से 13:28 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 18:07
रात 05:42 तक
तिथि
तृतीया, 15:38 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रेवती, 16:03 तक
अश्विनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:42 – 07:15शुभ
अमृत07:15 – 08:48शुभ
काल08:48 – 10:21टालें
शुभ10:21 – 11:54शुभ
रोग11:54 – 13:28टालें
उद्वेग13:28 – 15:01टालें
चर15:01 – 16:34सामान्य
लाभ16:34 – 18:07शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:07 – 19:34टालें
शुभ19:34 – 21:01शुभ
अमृत21:01 – 22:28शुभ
चर22:28 – 23:55सामान्य
रोग23:55 – 01:21टालें
काल01:21 – 02:48टालें
लाभ02:48 – 04:15शुभ
उद्वेग04:15 – 05:42टालें

10 सितंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 15:38 तक
कृष्ण चतुर्थी 12:46, 11 सित॰ तक
नक्षत्र
रेवती 16:03 तक
अश्विनी 13:58, 11 सित॰ तक
योग
वृद्धि 20:31 तक
ध्रुव 17:04, 11 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:38 तक
बव 02:11, 11 सित॰ तक
बालव 12:46, 11 सित॰ तक
चंद्र राशि
मीन 16:03 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
18:07
चंद्रोदय
19:47
चंद्रास्त
08:06
दिनमान
12h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
11:30 – 12:19 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:54 – 13:28
यमगंड
07:15 – 08:48
गुलिक काल
10:21 – 11:54

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4206:44दिन
चंद्र06:4407:46दिन
शनि07:4608:48दिन
गुरु08:4809:50दिन
मंगल09:5010:52दिन
सूर्य10:5211:54दिन
शुक्र11:5412:57दिन
बुध12:5713:59दिन
चंद्र13:5915:01दिन
शनि15:0116:03दिन
गुरु16:0317:05दिन
मंगल17:0518:07दिन
सूर्य18:0719:05रात
शुक्र19:0520:03रात
बुध20:0321:01रात
चंद्र21:0121:59रात
शनि21:5922:57रात
गुरु22:5723:55रात
मंगल23:5500:52रात
सूर्य00:5201:50रात
शुक्र01:5002:48रात
बुध02:4803:46रात
चंद्र03:4604:44रात
शनि04:4405:42रात

अयनांश 24.2159° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।