12 दिसंबर 2025 को वाराणसी का चौघड़िया

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (14:57 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (05:50, 13 दिस॰ तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:09 पर है। राहुकाल 10:32 से 11:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 17:09
रात 06:34 तक
तिथि
अष्टमी, 14:57 तक
नवमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 05:50 तक
हस्त
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:34 – 07:53सामान्य
लाभ07:53 – 09:12शुभ
अमृत09:12 – 10:32शुभ
काल10:32 – 11:51टालें
शुभ11:51 – 13:11शुभ
रोग13:11 – 14:30टालें
उद्वेग14:30 – 15:49टालें
चर15:49 – 17:09सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:09 – 18:50टालें
काल18:50 – 20:30टालें
लाभ20:30 – 22:11शुभ
उद्वेग22:11 – 23:52टालें
शुभ23:52 – 01:32शुभ
अमृत01:32 – 03:13शुभ
चर03:13 – 04:54सामान्य
रोग04:54 – 06:34टालें

12 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 14:57 तक
कृष्ण नवमी 16:38, 13 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 05:50, 13 दिस॰ तक
हस्त 08:18, 14 दिस॰ तक
योग
प्रीति 11:12 तक
आयुष्मान 11:16, 13 दिस॰ तक
करण
कौलव 14:57 तक
तैतिल 03:43, 13 दिस॰ तक
गर 16:38, 13 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 10:20 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
17:09
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
12:15
दिनमान
10h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:46 – 05:40
अभिजीत मुहूर्त
11:30 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
10:32 – 11:51
यमगंड
14:30 – 15:49
गुलिक काल
07:53 – 09:12

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3407:27दिन
बुध07:2708:19दिन
चंद्र08:1909:12दिन
शनि09:1210:05दिन
गुरु10:0510:58दिन
मंगल10:5811:51दिन
सूर्य11:5112:44दिन
शुक्र12:4413:37दिन
बुध13:3714:30दिन
चंद्र14:3015:23दिन
शनि15:2316:16दिन
गुरु16:1617:09दिन
मंगल17:0918:16रात
सूर्य18:1619:23रात
शुक्र19:2320:30रात
बुध20:3021:37रात
चंद्र21:3722:44रात
शनि22:4423:52रात
गुरु23:5200:59रात
मंगल00:5902:06रात
सूर्य02:0603:13रात
शुक्र03:1304:20रात
बुध04:2005:27रात
चंद्र05:2706:34रात

अयनांश 24.2195° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।