4 जनवरी 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

रविवार, 4 जनवरी 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 4 जनवरी 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (12:30 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (15:11 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 17:21 पर है। राहुकाल 16:01 से 17:21 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 17:21
रात 06:44 तक
तिथि
प्रतिपदा, 12:30 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पुनर्वसु, 15:11 तक
पुष्य
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:44 – 08:04टालें
चर08:04 – 09:23सामान्य
लाभ09:23 – 10:43शुभ
अमृत10:43 – 12:02शुभ
काल12:02 – 13:22टालें
शुभ13:22 – 14:42शुभ
रोग14:42 – 16:01टालें
उद्वेग16:01 – 17:21टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:21 – 19:01शुभ
अमृत19:01 – 20:42शुभ
चर20:42 – 22:22सामान्य
रोग22:22 – 00:03टालें
काल00:03 – 01:43टालें
लाभ01:43 – 03:23शुभ
उद्वेग03:23 – 05:04टालें
शुभ05:04 – 06:44शुभ

4 जनवरी 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 12:30 तक
कृष्ण द्वितीया 09:57, 5 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 13:25, 5 जन॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 01:47, 5 जन॰ तक
विष्कंभअशुभ 22:47, 5 जन॰ तक
करण
कौलव 12:30 तक
तैतिल 23:09 तक
गर 09:57, 5 जन॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 09:43 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
17:21
चंद्रोदय
18:24
चंद्रास्त
07:35
दिनमान
10h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:57 – 05:50
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
16:01 – 17:21
यमगंड
12:02 – 13:22
गुलिक काल
14:42 – 16:01

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4407:37दिन
शुक्र07:3708:30दिन
बुध08:3009:23दिन
चंद्र09:2310:16दिन
शनि10:1611:09दिन
गुरु11:0912:02दिन
मंगल12:0212:56दिन
सूर्य12:5613:49दिन
शुक्र13:4914:42दिन
बुध14:4215:35दिन
चंद्र15:3516:28दिन
शनि16:2817:21दिन
गुरु17:2118:28रात
मंगल18:2819:35रात
सूर्य19:3520:42रात
शुक्र20:4221:49रात
बुध21:4922:56रात
चंद्र22:5600:03रात
शनि00:0301:10रात
गुरु01:1002:16रात
मंगल02:1603:23रात
सूर्य03:2304:30रात
शुक्र04:3005:37रात
बुध05:3706:44रात

अयनांश 24.2204° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।