3 मार्च 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

मंगलवार, 3 मार्च 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 3 मार्च 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (17:07 तक), नक्षत्र मघा (07:31 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:19 पर और सूर्यास्त 18:00 पर है। राहुकाल 15:05 से 16:33 तक है।

दिन और रात
दिन 06:19 – 18:00
रात 06:18 तक
तिथि
पूर्णिमा, 17:07 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:19 – 07:47टालें
उद्वेग07:47 – 09:14टालें
चर09:14 – 10:42सामान्य
लाभ10:42 – 12:10शुभ
अमृत12:10 – 13:37शुभ
काल13:37 – 15:05टालें
शुभ15:05 – 16:33शुभ
रोग16:33 – 18:00टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:00 – 19:33टालें
लाभ19:33 – 21:05शुभ
उद्वेग21:05 – 22:37टालें
शुभ22:37 – 00:09शुभ
अमृत00:09 – 01:41शुभ
चर01:41 – 03:14सामान्य
रोग03:14 – 04:46टालें
काल04:46 – 06:18टालें

3 मार्च 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
पूर्णिमा 17:07 तक
कृष्ण प्रतिपदा 16:49, 4 मार्च तक
नक्षत्र
मघा 07:31 तक
पूर्वा फाल्गुनी 07:39, 4 मार्च तक
योग
सुकर्मा 10:24 तक
धृति 08:52, 4 मार्च तक
करण
बव 17:07 तक
बालव 04:54, 4 मार्च तक
कौलव 16:49, 4 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:19
सूर्यास्त
18:00
चंद्रोदय
17:59
चंद्रास्त
06:06
दिनमान
11h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:40 – 05:30
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
15:05 – 16:33
यमगंड
09:14 – 10:42
गुलिक काल
12:10 – 13:37

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:1907:17दिन
सूर्य07:1708:16दिन
शुक्र08:1609:14दिन
बुध09:1410:13दिन
चंद्र10:1311:11दिन
शनि11:1112:10दिन
गुरु12:1013:08दिन
मंगल13:0814:07दिन
सूर्य14:0715:05दिन
शुक्र15:0516:04दिन
बुध16:0417:02दिन
चंद्र17:0218:00दिन
शनि18:0019:02रात
गुरु19:0220:03रात
मंगल20:0321:05रात
सूर्य21:0522:06रात
शुक्र22:0623:08रात
बुध23:0800:09रात
चंद्र00:0901:11रात
शनि01:1102:12रात
गुरु02:1203:14रात
मंगल03:1404:15रात
सूर्य04:1505:17रात
शुक्र05:1706:18रात

अयनांश 24.2226° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।