2 मई 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

शनिवार, 2 मई 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 2 मई 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (00:50, 3 मई तक), नक्षत्र विशाखा (07:10, 3 मई तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:21 पर और सूर्यास्त 18:29 पर है। राहुकाल 08:38 से 10:16 तक है।

दिन और रात
दिन 05:21 – 18:29
रात 05:20 तक
तिथि
प्रतिपदा, 00:50 तक
द्वितीया
नक्षत्र
विशाखा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 मई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:21 – 06:59टालें
शुभ06:59 – 08:38शुभ
रोग08:38 – 10:16टालें
उद्वेग10:16 – 11:55टालें
चर11:55 – 13:33सामान्य
लाभ13:33 – 15:12शुभ
अमृत15:12 – 16:50शुभ
काल16:50 – 18:29टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:29 – 19:50शुभ
उद्वेग19:50 – 21:11टालें
शुभ21:11 – 22:33शुभ
अमृत22:33 – 23:54शुभ
चर23:54 – 01:16सामान्य
रोग01:16 – 02:37टालें
काल02:37 – 03:59टालें
लाभ03:59 – 05:20शुभ

2 मई 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 00:50, 3 मई तक
कृष्ण द्वितीया 03:02, 4 मई तक
नक्षत्र
विशाखा 07:10, 3 मई तक
योग
व्यतीपातअशुभ 21:44 तक
वरीयान 22:28, 3 मई तक
करण
बालव 11:49 तक
कौलव 00:50, 3 मई तक
तैतिल 13:54, 3 मई तक
चंद्र राशि
तुला 00:30, 3 मई तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:21
सूर्यास्त
18:29
चंद्रोदय
19:13
चंद्रास्त
05:19
दिनमान
13h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:29 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
08:38 – 10:16
यमगंड
13:33 – 15:12
गुलिक काल
05:21 – 06:59

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2106:27दिन
गुरु06:2707:32दिन
मंगल07:3208:38दिन
सूर्य08:3809:44दिन
शुक्र09:4410:49दिन
बुध10:4911:55दिन
चंद्र11:5513:00दिन
शनि13:0014:06दिन
गुरु14:0615:12दिन
मंगल15:1216:17दिन
सूर्य16:1717:23दिन
शुक्र17:2318:29दिन
बुध18:2919:23रात
चंद्र19:2320:17रात
शनि20:1721:11रात
गुरु21:1122:06रात
मंगल22:0623:00रात
सूर्य23:0023:54रात
शुक्र23:5400:49रात
बुध00:4901:43रात
चंद्र01:4302:37रात
शनि02:3703:32रात
गुरु03:3204:26रात
मंगल04:2605:20रात

अयनांश 24.2249° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।