16 मई 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

शनिवार, 16 मई 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 16 मई 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (01:31, 17 मई तक), नक्षत्र भरणी (17:30 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 18:36 पर है। राहुकाल 08:33 से 10:14 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 18:36
रात 05:12 तक
तिथि
अमावस्या, 01:31 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
भरणी, 17:30 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 मई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:12 – 06:53टालें
शुभ06:53 – 08:33शुभ
रोग08:33 – 10:14टालें
उद्वेग10:14 – 11:54टालें
चर11:54 – 13:35सामान्य
लाभ13:35 – 15:15शुभ
अमृत15:15 – 16:55शुभ
काल16:55 – 18:36टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:36 – 19:55शुभ
उद्वेग19:55 – 21:15टालें
शुभ21:15 – 22:34शुभ
अमृत22:34 – 23:54शुभ
चर23:54 – 01:13सामान्य
रोग01:13 – 02:33टालें
काल02:33 – 03:52टालें
लाभ03:52 – 05:12शुभ

16 मई 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
अमावस्या 01:31, 17 मई तक
शुक्ल प्रतिपदा 21:41, 17 मई तक
नक्षत्र
भरणी 17:30 तक
कृत्तिका 14:32, 17 मई तक
योग
सौभाग्य 10:25 तक
शोभन 06:15, 17 मई तक
करण
चतुष्पद 15:23 तक
नाग 01:31, 17 मई तक
किंस्तुघ्न 11:36, 17 मई तक
चंद्र राशि
मेष 22:46 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
18:36
चंद्रोदय
04:19
चंद्रास्त
18:16
दिनमान
13h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:30
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
08:33 – 10:14
यमगंड
13:35 – 15:15
गुलिक काल
05:12 – 06:53

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:1206:19दिन
गुरु06:1907:26दिन
मंगल07:2608:33दिन
सूर्य08:3309:40दिन
शुक्र09:4010:47दिन
बुध10:4711:54दिन
चंद्र11:5413:01दिन
शनि13:0114:08दिन
गुरु14:0815:15दिन
मंगल15:1516:22दिन
सूर्य16:2217:29दिन
शुक्र17:2918:36दिन
बुध18:3619:29रात
चंद्र19:2920:22रात
शनि20:2221:15रात
गुरु21:1522:08रात
मंगल22:0823:01रात
सूर्य23:0123:54रात
शुक्र23:5400:47रात
बुध00:4701:40रात
चंद्र01:4002:33रात
शनि02:3303:26रात
गुरु03:2604:19रात
मंगल04:1905:12रात

अयनांश 24.2254° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।