28 जुलाई 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

मंगलवार, 28 जुलाई 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (18:19 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (13:11 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 15:25 से 17:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 18:45
रात 05:23 तक
तिथि
चतुर्दशी, 18:19 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 13:11 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:23 – 07:03टालें
उद्वेग07:03 – 08:43टालें
चर08:43 – 10:24सामान्य
लाभ10:24 – 12:04शुभ
अमृत12:04 – 13:44शुभ
काल13:44 – 15:25टालें
शुभ15:25 – 17:05शुभ
रोग17:05 – 18:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:45 – 20:05टालें
लाभ20:05 – 21:25शुभ
उद्वेग21:25 – 22:45टालें
शुभ22:45 – 00:04शुभ
अमृत00:04 – 01:24शुभ
चर01:24 – 02:44सामान्य
रोग02:44 – 04:03टालें
काल04:03 – 05:23टालें

28 जुलाई 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 18:19 तक
पूर्णिमा 20:05, 29 जुल॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 15:37, 29 जुल॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 23:33 तक
प्रीति 23:57, 29 जुल॰ तक
करण
वणिज 18:19 तक
विष्टि (भद्रा) 07:15, 29 जुल॰ तक
चंद्र राशि
धनु 19:49 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
18:06
चंद्रास्त
03:54
दिनमान
13h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:58 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
15:25 – 17:05
यमगंड
08:43 – 10:24
गुलिक काल
12:04 – 13:44

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:2306:30दिन
सूर्य06:3007:36दिन
शुक्र07:3608:43दिन
बुध08:4309:50दिन
चंद्र09:5010:57दिन
शनि10:5712:04दिन
गुरु12:0413:11दिन
मंगल13:1114:18दिन
सूर्य14:1815:25दिन
शुक्र15:2516:32दिन
बुध16:3217:38दिन
चंद्र17:3818:45दिन
शनि18:4519:38रात
गुरु19:3820:32रात
मंगल20:3221:25रात
सूर्य21:2522:18रात
शुक्र22:1823:11रात
बुध23:1100:04रात
चंद्र00:0400:57रात
शनि00:5701:51रात
गुरु01:5102:44रात
मंगल02:4403:37रात
सूर्य03:3704:30रात
शुक्र04:3005:23रात

अयनांश 24.2282° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।