16 अक्टूबर 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (05:54, 17 अक्टू॰ तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (06:47 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 17:30 पर है। राहुकाल 10:16 से 11:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 17:30
रात 05:57 तक
तिथि
षष्ठी, 05:54 तक
नक्षत्र
मूल
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:56 – 07:23सामान्य
लाभ07:23 – 08:50शुभ
अमृत08:50 – 10:16शुभ
काल10:16 – 11:43टालें
शुभ11:43 – 13:10शुभ
रोग13:10 – 14:36टालें
उद्वेग14:36 – 16:03टालें
चर16:03 – 17:30सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:30 – 19:03टालें
काल19:03 – 20:37टालें
लाभ20:37 – 22:10शुभ
उद्वेग22:10 – 23:43टालें
शुभ23:43 – 01:17शुभ
अमृत01:17 – 02:50शुभ
चर02:50 – 04:23सामान्य
रोग04:23 – 05:57टालें

16 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 05:54, 17 अक्टू॰ तक
शुक्ल सप्तमी 08:28, 18 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 09:47, 17 अक्टू॰ तक
योग
शोभन 22:05 तक
अतिगंडअशुभ 23:02, 17 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 16:38 तक
तैतिल 05:54, 17 अक्टू॰ तक
गर 19:12, 17 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
17:30
चंद्रोदय
11:00
चंद्रास्त
21:26
दिनमान
11h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:20 – 12:06

अशुभ समय

राहुकाल
10:16 – 11:43
यमगंड
14:36 – 16:03
गुलिक काल
07:23 – 08:50

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5606:54दिन
बुध06:5407:52दिन
चंद्र07:5208:50दिन
शनि08:5009:47दिन
गुरु09:4710:45दिन
मंगल10:4511:43दिन
सूर्य11:4312:41दिन
शुक्र12:4113:39दिन
बुध13:3914:36दिन
चंद्र14:3615:34दिन
शनि15:3416:32दिन
गुरु16:3217:30दिन
मंगल17:3018:32रात
सूर्य18:3219:34रात
शुक्र19:3420:37रात
बुध20:3721:39रात
चंद्र21:3922:41रात
शनि22:4123:43रात
गुरु23:4300:46रात
मंगल00:4601:48रात
सूर्य01:4802:50रात
शुक्र02:5003:52रात
बुध03:5204:55रात
चंद्र04:5505:57रात

अयनांश 24.2313° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।