25 दिसंबर 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (23:26 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (22:50 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:41 पर और सूर्यास्त 17:15 पर है। राहुकाल 10:38 से 11:58 तक है।

दिन और रात
दिन 06:41 – 17:15
रात 06:41 तक
तिथि
द्वितीया, 23:26 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुनर्वसु, 22:50 तक
पुष्य
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:41 – 08:00सामान्य
लाभ08:00 – 09:19शुभ
अमृत09:19 – 10:38शुभ
काल10:38 – 11:58टालें
शुभ11:58 – 13:17शुभ
रोग13:17 – 14:36टालें
उद्वेग14:36 – 15:55टालें
चर15:55 – 17:15सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:15 – 18:55टालें
काल18:55 – 20:36टालें
लाभ20:36 – 22:17शुभ
उद्वेग22:17 – 23:58टालें
शुभ23:58 – 01:39शुभ
अमृत01:39 – 03:19शुभ
चर03:19 – 05:00सामान्य
रोग05:00 – 06:41टालें

25 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 23:26 तक
कृष्ण तृतीया 20:05, 26 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 20:13, 26 दिस॰ तक
योग
ब्रह्म 08:28 तक
इंद्र 04:16, 26 दिस॰ तक
वैधृतिअशुभ 00:22, 27 दिस॰ तक
करण
तैतिल 13:15 तक
गर 23:26 तक
वणिज 09:42, 26 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 17:33 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:41
सूर्यास्त
17:15
चंद्रोदय
18:45
चंद्रास्त
07:53
दिनमान
10h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:19

अशुभ समय

राहुकाल
10:38 – 11:58
यमगंड
14:36 – 15:55
गुलिक काल
08:00 – 09:19

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4107:33दिन
बुध07:3308:26दिन
चंद्र08:2609:19दिन
शनि09:1910:12दिन
गुरु10:1211:05दिन
मंगल11:0511:58दिन
सूर्य11:5812:50दिन
शुक्र12:5013:43दिन
बुध13:4314:36दिन
चंद्र14:3615:29दिन
शनि15:2916:22दिन
गुरु16:2217:15दिन
मंगल17:1518:22रात
सूर्य18:2219:29रात
शुक्र19:2920:36रात
बुध20:3621:43रात
चंद्र21:4322:51रात
शनि22:5123:58रात
गुरु23:5801:05रात
मंगल01:0502:12रात
सूर्य02:1203:19रात
शुक्र03:1904:27रात
बुध04:2705:34रात
चंद्र05:3406:41रात

अयनांश 24.2340° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।