14 फ़रवरी 2027 को वाराणसी का चौघड़िया

रविवार, 14 फ़रवरी 2027, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 14 फ़रवरी 2027 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (00:41, 15 फ़र॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (04:46, 15 फ़र॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 16:26 से 17:50 तक है।

दिन और रात
दिन 06:33 – 17:50
रात 06:33 तक
तिथि
अष्टमी, 00:41 तक
नवमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 04:46 तक
रोहिणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:33 – 07:58टालें
चर07:58 – 09:23सामान्य
लाभ09:23 – 10:47शुभ
अमृत10:47 – 12:12शुभ
काल12:12 – 13:37टालें
शुभ13:37 – 15:01शुभ
रोग15:01 – 16:26टालें
उद्वेग16:26 – 17:50टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:50 – 19:26शुभ
अमृत19:26 – 21:01शुभ
चर21:01 – 22:36सामान्य
रोग22:36 – 00:12टालें
काल00:12 – 01:47टालें
लाभ01:47 – 03:22शुभ
उद्वेग03:22 – 04:57टालें
शुभ04:57 – 06:33शुभ

14 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 00:41, 15 फ़र॰ तक
शुक्ल नवमी 22:44, 15 फ़र॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 04:46, 15 फ़र॰ तक
रोहिणी 03:25, 16 फ़र॰ तक
योग
ब्रह्म 15:08 तक
इंद्र 12:33, 15 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:28 तक
बव 00:41, 15 फ़र॰ तक
बालव 11:46, 15 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मेष 11:28 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:33
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
10:54
चंद्रास्त
00:02
दिनमान
11h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:42
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
16:26 – 17:50
यमगंड
12:12 – 13:37
गुलिक काल
15:01 – 16:26

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3307:30दिन
शुक्र07:3008:26दिन
बुध08:2609:23दिन
चंद्र09:2310:19दिन
शनि10:1911:15दिन
गुरु11:1512:12दिन
मंगल12:1213:08दिन
सूर्य13:0814:05दिन
शुक्र14:0515:01दिन
बुध15:0115:58दिन
चंद्र15:5816:54दिन
शनि16:5417:50दिन
गुरु17:5018:54रात
मंगल18:5419:58रात
सूर्य19:5821:01रात
शुक्र21:0122:05रात
बुध22:0523:08रात
चंद्र23:0800:12रात
शनि00:1201:15रात
गुरु01:1502:19रात
मंगल02:1903:22रात
सूर्य03:2204:26रात
शुक्र04:2605:29रात
बुध05:2906:33रात

अयनांश 24.2359° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।