18 दिसंबर 2027 को वाराणसी का चौघड़िया

शनिवार, 18 दिसंबर 2027, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 18 दिसंबर 2027 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (07:58 तक), नक्षत्र मघा (03:30, 19 दिस॰ तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 17:11 पर है। राहुकाल 09:15 से 10:35 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 17:11
रात 06:37 तक
तिथि
षष्ठी, 05:36 तक
नक्षत्र
मघा, 03:30 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:37 – 07:56टालें
शुभ07:56 – 09:15शुभ
रोग09:15 – 10:35टालें
उद्वेग10:35 – 11:54टालें
चर11:54 – 13:13सामान्य
लाभ13:13 – 14:32शुभ
अमृत14:32 – 15:52शुभ
काल15:52 – 17:11टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:11 – 18:52शुभ
उद्वेग18:52 – 20:33टालें
शुभ20:33 – 22:13शुभ
अमृत22:13 – 23:54शुभ
चर23:54 – 01:35सामान्य
रोग01:35 – 03:16टालें
काल03:16 – 04:57टालें
लाभ04:57 – 06:37शुभ

18 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 07:58 तक
कृष्ण षष्ठी 05:36, 19 दिस॰ तक
कृष्ण सप्तमी 03:34, 20 दिस॰ तक
नक्षत्र
मघा 03:30, 19 दिस॰ तक
पूर्वा फाल्गुनी 02:07, 20 दिस॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 23:35 तक
प्रीति 20:37, 19 दिस॰ तक
करण
तैतिल 07:58 तक
गर 18:45 तक
वणिज 05:36, 19 दिस॰ तक
विष्टि (भद्रा) 16:32, 19 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
17:11
चंद्रोदय
22:17
चंद्रास्त
10:26
दिनमान
10h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
09:15 – 10:35
यमगंड
13:13 – 14:32
गुलिक काल
06:37 – 07:56

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3707:30दिन
गुरु07:3008:23दिन
मंगल08:2309:15दिन
सूर्य09:1510:08दिन
शुक्र10:0811:01दिन
बुध11:0111:54दिन
चंद्र11:5412:47दिन
शनि12:4713:40दिन
गुरु13:4014:32दिन
मंगल14:3215:25दिन
सूर्य15:2516:18दिन
शुक्र16:1817:11दिन
बुध17:1118:18रात
चंद्र18:1819:25रात
शनि19:2520:33रात
गुरु20:3321:40रात
मंगल21:4022:47रात
सूर्य22:4723:54रात
शुक्र23:5401:01रात
बुध01:0102:09रात
चंद्र02:0903:16रात
शनि03:1604:23रात
गुरु04:2305:30रात
मंगल05:3006:37रात

अयनांश 24.2477° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।