27 जून 2028 को वाराणसी का चौघड़िया

मंगलवार, 27 जून 2028, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 27 जून 2028 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (11:39 तक), नक्षत्र मघा (14:06 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 18:52 पर है। राहुकाल 15:26 से 17:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 18:52
रात 05:10 तक
तिथि
पंचमी, 11:39 तक
षष्ठी
नक्षत्र
मघा, 14:06 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 जून 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:10 – 06:52टालें
उद्वेग06:52 – 08:35टालें
चर08:35 – 10:18सामान्य
लाभ10:18 – 12:01शुभ
अमृत12:01 – 13:44शुभ
काल13:44 – 15:26टालें
शुभ15:26 – 17:09शुभ
रोग17:09 – 18:52टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:52 – 20:09टालें
लाभ20:09 – 21:26शुभ
उद्वेग21:26 – 22:44टालें
शुभ22:44 – 00:01शुभ
अमृत00:01 – 01:18शुभ
चर01:18 – 02:35सामान्य
रोग02:35 – 03:53टालें
काल03:53 – 05:10टालें

27 जून 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 11:39 तक
शुक्ल षष्ठी 09:08, 28 जून तक
नक्षत्र
मघा 14:06 तक
योग
वज्रअशुभ 05:49 तक
सिद्धि 02:40, 28 जून तक
व्यतीपातअशुभ 23:39, 28 जून तक
करण
बालव 11:39 तक
कौलव 22:22 तक
तैतिल 09:08, 28 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
18:52
चंद्रोदय
09:45
चंद्रास्त
22:27
दिनमान
13h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:28
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
15:26 – 17:09
यमगंड
08:35 – 10:18
गुलिक काल
12:01 – 13:44

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:1006:18दिन
सूर्य06:1807:27दिन
शुक्र07:2708:35दिन
बुध08:3509:44दिन
चंद्र09:4410:52दिन
शनि10:5212:01दिन
गुरु12:0113:09दिन
मंगल13:0914:18दिन
सूर्य14:1815:26दिन
शुक्र15:2616:35दिन
बुध16:3517:43दिन
चंद्र17:4318:52दिन
शनि18:5219:43रात
गुरु19:4320:35रात
मंगल20:3521:26रात
सूर्य21:2622:18रात
शुक्र22:1823:09रात
बुध23:0900:01रात
चंद्र00:0100:52रात
शनि00:5201:44रात
गुरु01:4402:35रात
मंगल02:3503:27रात
सूर्य03:2704:18रात
शुक्र04:1805:10रात

अयनांश 24.2550° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।