1 जून 2029 को वाराणसी का चौघड़िया

शुक्रवार, 1 जून 2029, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 1 जून 2029 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (16:10 तक), नक्षत्र श्रवण (04:09, 2 जून तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:07 पर और सूर्यास्त 18:44 पर है। राहुकाल 10:13 से 11:56 तक है।

दिन और रात
दिन 05:07 – 18:44
रात 05:07 तक
तिथि
पंचमी, 16:10 तक
षष्ठी
नक्षत्र
श्रवण, 04:09 तक
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:07 – 06:49सामान्य
लाभ06:49 – 08:31शुभ
अमृत08:31 – 10:13शुभ
काल10:13 – 11:56टालें
शुभ11:56 – 13:38शुभ
रोग13:38 – 15:20टालें
उद्वेग15:20 – 17:02टालें
चर17:02 – 18:44सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:44 – 20:02टालें
काल20:02 – 21:20टालें
लाभ21:20 – 22:38शुभ
उद्वेग22:38 – 23:55टालें
शुभ23:55 – 01:13शुभ
अमृत01:13 – 02:31शुभ
चर02:31 – 03:49सामान्य
रोग03:49 – 05:07टालें

1 जून 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 16:10 तक
कृष्ण षष्ठी 16:43, 2 जून तक
नक्षत्र
श्रवण 04:09, 2 जून तक
धनिष्ठा 05:43, 3 जून तक
योग
ब्रह्म 15:10 तक
इंद्र 14:35, 2 जून तक
करण
तैतिल 16:10 तक
गर 04:21, 2 जून तक
वणिज 16:43, 2 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:07
सूर्यास्त
18:44
चंद्रोदय
22:47
चंद्रास्त
09:24
दिनमान
13h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:44 – 04:26
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:23

अशुभ समय

राहुकाल
10:13 – 11:56
यमगंड
15:20 – 17:02
गुलिक काल
06:49 – 08:31

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:0706:15दिन
बुध06:1507:23दिन
चंद्र07:2308:31दिन
शनि08:3109:39दिन
गुरु09:3910:47दिन
मंगल10:4711:56दिन
सूर्य11:5613:04दिन
शुक्र13:0414:12दिन
बुध14:1215:20दिन
चंद्र15:2016:28दिन
शनि16:2817:36दिन
गुरु17:3618:44दिन
मंगल18:4419:36रात
सूर्य19:3620:28रात
शुक्र20:2821:20रात
बुध21:2022:12रात
चंद्र22:1223:04रात
शनि23:0423:55रात
गुरु23:5500:47रात
मंगल00:4701:39रात
सूर्य01:3902:31रात
शुक्र02:3103:23रात
बुध03:2304:15रात
चंद्र04:1505:07रात

अयनांश 24.2680° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।