15 सितंबर 2029 को वाराणसी का चौघड़िया

शनिवार, 15 सितंबर 2029, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 15 सितंबर 2029 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (18:22 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (10:05 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 08:48 से 10:20 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 18:02
रात 05:44 तक
तिथि
अष्टमी, 18:22 तक
नवमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 10:05 तक
मूल
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:44 – 07:16टालें
शुभ07:16 – 08:48शुभ
रोग08:48 – 10:20टालें
उद्वेग10:20 – 11:53टालें
चर11:53 – 13:25सामान्य
लाभ13:25 – 14:57शुभ
अमृत14:57 – 16:29शुभ
काल16:29 – 18:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:02 – 19:29शुभ
उद्वेग19:29 – 20:57टालें
शुभ20:57 – 22:25शुभ
अमृत22:25 – 23:53शुभ
चर23:53 – 01:21सामान्य
रोग01:21 – 02:48टालें
काल02:48 – 04:16टालें
लाभ04:16 – 05:44शुभ

15 सितंबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 18:22 तक
शुक्ल नवमी 17:32, 16 सित॰ तक
नक्षत्र
मूल 09:46, 16 सित॰ तक
योग
प्रीति 07:19 तक
आयुष्मान 05:20, 16 सित॰ तक
सौभाग्य 03:47, 17 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:59 तक
बव 18:22 तक
बालव 05:53, 16 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
12:50
चंद्रास्त
23:38
दिनमान
12h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:17

अशुभ समय

राहुकाल
08:48 – 10:20
यमगंड
13:25 – 14:57
गुलिक काल
05:44 – 07:16

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4406:45दिन
गुरु06:4507:47दिन
मंगल07:4708:48दिन
सूर्य08:4809:50दिन
शुक्र09:5010:51दिन
बुध10:5111:53दिन
चंद्र11:5312:54दिन
शनि12:5413:56दिन
गुरु13:5614:57दिन
मंगल14:5715:59दिन
सूर्य15:5917:00दिन
शुक्र17:0018:02दिन
बुध18:0219:00रात
चंद्र19:0019:59रात
शनि19:5920:57रात
गुरु20:5721:56रात
मंगल21:5622:54रात
सूर्य22:5423:53रात
शुक्र23:5300:51रात
बुध00:5101:50रात
चंद्र01:5002:48रात
शनि02:4803:47रात
गुरु03:4704:45रात
मंगल04:4505:44रात

अयनांश 24.2720° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।