3 मार्च 2025 को वृंदावन का चौघड़िया

सोमवार, 3 मार्च 2025, वृंदावन, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 3 मार्च 2025 को वृंदावन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (18:02 तक), नक्षत्र अश्विनी (04:29, 4 मार्च तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:41 पर और सूर्यास्त 18:20 पर है। राहुकाल 08:09 से 09:36 तक है।

दिन और रात
दिन 06:41 – 18:20
रात 06:40 तक
तिथि
चतुर्थी, 18:02 तक
पंचमी
नक्षत्र
अश्विनी, 04:29 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:41 – 08:09शुभ
काल08:09 – 09:36टालें
शुभ09:36 – 11:03शुभ
रोग11:03 – 12:31टालें
उद्वेग12:31 – 13:58टालें
चर13:58 – 15:26सामान्य
लाभ15:26 – 16:53शुभ
अमृत16:53 – 18:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:20 – 19:53सामान्य
रोग19:53 – 21:25टालें
काल21:25 – 22:58टालें
लाभ22:58 – 00:30शुभ
उद्वेग00:30 – 02:03टालें
शुभ02:03 – 03:35शुभ
अमृत03:35 – 05:08शुभ
चर05:08 – 06:40सामान्य

3 मार्च 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 18:02 तक
शुक्ल पंचमी 15:17, 4 मार्च तक
नक्षत्र
अश्विनी 04:29, 4 मार्च तक
भरणी 02:37, 5 मार्च तक
योग
शुक्ल 08:57 तक
ब्रह्म 05:24, 4 मार्च तक
इंद्र 02:06, 5 मार्च तक
करण
वणिज 07:31 तक
विष्टि (भद्रा) 18:02 तक
बव 04:37, 4 मार्च तक
बालव 15:17, 4 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:41
सूर्यास्त
18:20
चंद्रोदय
08:40
चंद्रास्त
22:06
दिनमान
11h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
08:09 – 09:36
यमगंड
11:03 – 12:31
गुलिक काल
13:58 – 15:26

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4107:39दिन
शनि07:3908:38दिन
गुरु08:3809:36दिन
मंगल09:3610:34दिन
सूर्य10:3411:33दिन
शुक्र11:3312:31दिन
बुध12:3113:29दिन
चंद्र13:2914:27दिन
शनि14:2715:26दिन
गुरु15:2616:24दिन
मंगल16:2417:22दिन
सूर्य17:2218:20दिन
शुक्र18:2019:22रात
बुध19:2220:24रात
चंद्र20:2421:25रात
शनि21:2522:27रात
गुरु22:2723:29रात
मंगल23:2900:30रात
सूर्य00:3001:32रात
शुक्र01:3202:34रात
बुध02:3403:35रात
चंद्र03:3504:37रात
शनि04:3705:38रात
गुरु05:3806:40रात

अयनांश 24.2086° (लाहिड़ी)। समय वृंदावन (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।