25 मार्च 2025 को वृंदावन का चौघड़िया

मंगलवार, 25 मार्च 2025, वृंदावन, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 25 मार्च 2025 को वृंदावन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (03:45, 26 मार्च तक), नक्षत्र श्रवण (03:49, 26 मार्च तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:17 पर और सूर्यास्त 18:33 पर है। राहुकाल 15:29 से 17:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:17 – 18:33
रात 06:16 तक
तिथि
एकादशी, 03:45 तक
द्वादशी
नक्षत्र
श्रवण, 03:49 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:17 – 07:49टालें
उद्वेग07:49 – 09:21टालें
चर09:21 – 10:53सामान्य
लाभ10:53 – 12:25शुभ
अमृत12:25 – 13:57शुभ
काल13:57 – 15:29टालें
शुभ15:29 – 17:01शुभ
रोग17:01 – 18:33टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:33 – 20:01टालें
लाभ20:01 – 21:28शुभ
उद्वेग21:28 – 22:56टालें
शुभ22:56 – 00:24शुभ
अमृत00:24 – 01:52शुभ
चर01:52 – 03:20सामान्य
रोग03:20 – 04:48टालें
काल04:48 – 06:16टालें

25 मार्च 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 03:45, 26 मार्च तक
कृष्ण द्वादशी 01:43, 27 मार्च तक
नक्षत्र
श्रवण 03:49, 26 मार्च तक
धनिष्ठा 02:29, 27 मार्च तक
योग
शिव 14:53 तक
सिद्ध 12:25, 26 मार्च तक
करण
बव 16:31 तक
बालव 03:46, 26 मार्च तक
कौलव 14:49, 26 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:17
सूर्यास्त
18:33
चंद्रोदय
03:30
चंद्रास्त
14:11
दिनमान
12h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:30
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:49

अशुभ समय

राहुकाल
15:29 – 17:01
यमगंड
09:21 – 10:53
गुलिक काल
12:25 – 13:57

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:1707:18दिन
सूर्य07:1808:20दिन
शुक्र08:2009:21दिन
बुध09:2110:22दिन
चंद्र10:2211:24दिन
शनि11:2412:25दिन
गुरु12:2513:26दिन
मंगल13:2614:27दिन
सूर्य14:2715:29दिन
शुक्र15:2916:30दिन
बुध16:3017:31दिन
चंद्र17:3118:33दिन
शनि18:3319:31रात
गुरु19:3120:30रात
मंगल20:3021:28रात
सूर्य21:2822:27रात
शुक्र22:2723:26रात
बुध23:2600:24रात
चंद्र00:2401:23रात
शनि01:2302:22रात
गुरु02:2203:20रात
मंगल03:2004:19रात
सूर्य04:1905:17रात
शुक्र05:1706:16रात

अयनांश 24.2095° (लाहिड़ी)। समय वृंदावन (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।