9 अप्रैल 2025 को वृंदावन का चौघड़िया

बुधवार, 9 अप्रैल 2025, वृंदावन, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 9 अप्रैल 2025 को वृंदावन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (22:56 तक), नक्षत्र मघा (09:57 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:40 पर है। राहुकाल 12:20 से 13:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:40
रात 05:59 तक
तिथि
द्वादशी, 22:56 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
मघा, 09:57 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:01 – 07:36शुभ
अमृत07:36 – 09:11शुभ
काल09:11 – 10:45टालें
शुभ10:45 – 12:20शुभ
रोग12:20 – 13:55टालें
उद्वेग13:55 – 15:30टालें
चर15:30 – 17:05सामान्य
लाभ17:05 – 18:40शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:40 – 20:05टालें
शुभ20:05 – 21:30शुभ
अमृत21:30 – 22:55शुभ
चर22:55 – 00:20सामान्य
रोग00:20 – 01:45टालें
काल01:45 – 03:10टालें
लाभ03:10 – 04:35शुभ
उद्वेग04:35 – 05:59टालें

9 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 22:56 तक
शुक्ल त्रयोदशी 01:01, 11 अप्रैल तक
नक्षत्र
मघा 09:57 तक
पूर्वा फाल्गुनी 12:24, 10 अप्रैल तक
योग
गंडअशुभ 18:25 तक
वृद्धि 18:58, 10 अप्रैल तक
करण
बव 10:01 तक
बालव 22:56 तक
कौलव 11:56, 10 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:40
चंद्रोदय
15:38
चंद्रास्त
04:02
दिनमान
12h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:46 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:20 – 13:55
यमगंड
07:36 – 09:11
गुलिक काल
10:45 – 12:20

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0107:04दिन
चंद्र07:0408:07दिन
शनि08:0709:11दिन
गुरु09:1110:14दिन
मंगल10:1411:17दिन
सूर्य11:1712:20दिन
शुक्र12:2013:24दिन
बुध13:2414:27दिन
चंद्र14:2715:30दिन
शनि15:3016:34दिन
गुरु16:3417:37दिन
मंगल17:3718:40दिन
सूर्य18:4019:37रात
शुक्र19:3720:34रात
बुध20:3421:30रात
चंद्र21:3022:27रात
शनि22:2723:23रात
गुरु23:2300:20रात
मंगल00:2001:17रात
सूर्य01:1702:13रात
शुक्र02:1303:10रात
बुध03:1004:06रात
चंद्र04:0605:03रात
शनि05:0305:59रात

अयनांश 24.2101° (लाहिड़ी)। समय वृंदावन (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।