2 अक्टूबर 2026 को वारंगल का चौघड़िया

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026, वारंगल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को वारंगल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (10:15 तक), नक्षत्र मृगशिरा (02:55, 3 अक्टू॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 10:31 से 12:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 17:59
रात 06:02 तक
तिथि
षष्ठी, 10:15 तक
सप्तमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 02:55 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:02 – 07:31सामान्य
लाभ07:31 – 09:01शुभ
अमृत09:01 – 10:31शुभ
काल10:31 – 12:00टालें
शुभ12:00 – 13:30शुभ
रोग13:30 – 15:00टालें
उद्वेग15:00 – 16:29टालें
चर16:29 – 17:59सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:59 – 19:30टालें
काल19:30 – 21:00टालें
लाभ21:00 – 22:30शुभ
उद्वेग22:30 – 00:01टालें
शुभ00:01 – 01:31शुभ
अमृत01:31 – 03:01शुभ
चर03:01 – 04:32सामान्य
रोग04:32 – 06:02टालें

2 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 10:15 तक
कृष्ण सप्तमी 08:00, 3 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 02:55, 3 अक्टू॰ तक
आर्द्रा 01:29, 4 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 18:17 तक
वरीयान 15:21, 3 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 10:15 तक
विष्टि (भद्रा) 21:07 तक
बव 08:00, 3 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 15:40 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
22:39
चंद्रास्त
11:29
दिनमान
11h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:14
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
10:31 – 12:00
यमगंड
15:00 – 16:29
गुलिक काल
07:31 – 09:01

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0207:02दिन
बुध07:0208:01दिन
चंद्र08:0109:01दिन
शनि09:0110:01दिन
गुरु10:0111:01दिन
मंगल11:0112:00दिन
सूर्य12:0013:00दिन
शुक्र13:0014:00दिन
बुध14:0015:00दिन
चंद्र15:0016:00दिन
शनि16:0016:59दिन
गुरु16:5917:59दिन
मंगल17:5918:59रात
सूर्य18:5920:00रात
शुक्र20:0021:00रात
बुध21:0022:00रात
चंद्र22:0023:00रात
शनि23:0000:01रात
गुरु00:0101:01रात
मंगल01:0102:01रात
सूर्य02:0103:01रात
शुक्र03:0104:01रात
बुध04:0105:02रात
चंद्र05:0206:02रात

अयनांश 24.2307° (लाहिड़ी)। समय वारंगल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।