गृह प्रवेश मुहूर्त 2066

2066 में नई दिल्ली के लिए गृह प्रवेश के 45 शुभ दिन, उन समय-अवधियों के साथ जिनमें सभी शर्तें पूरी होती हैं।

गृह प्रवेश का अगला मुहूर्त: शुक्रवार, 29 जनवरी 2066 — 19:45 – 07:10 (30 जन॰)

जनवरी 2066 · 2 दिन

तारीखमुहूर्त
शुक्रवार, 29 जन॰
19:45 – 07:10 (30 जन॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल पंचमी
शनिवार, 30 जन॰
07:10 – 19:38
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल पंचमी

फ़रवरी 2066 · 10 दिन

तारीखमुहूर्त
बुधवार, 3 फ़र॰
05:50 (4 फ़र॰) – 07:07 (4 फ़र॰)
नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: शुक्ल दशमी
गुरुवार, 4 फ़र॰
07:07 – 07:06 (5 फ़र॰)
नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
शुक्रवार, 5 फ़र॰
07:06 – 07:06 (6 फ़र॰)
नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा · तिथि: शुक्ल एकादशी
शनिवार, 6 फ़र॰
07:06 – 08:10
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल एकादशी
शुक्रवार, 12 फ़र॰
20:02 – 07:00 (13 फ़र॰)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण तृतीया
शनिवार, 13 फ़र॰
07:00 – 12:52
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण तृतीया
सोमवार, 15 फ़र॰
06:59 – 10:15
नक्षत्र: चित्रा · तिथि: कृष्ण पंचमी
गुरुवार, 25 फ़र॰
05:31 (26 फ़र॰) – 06:49 (26 फ़र॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल द्वितीया
शुक्रवार, 26 फ़र॰
06:49 – 06:48 (27 फ़र॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवती · तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया
शनिवार, 27 फ़र॰
06:48 – 12:33
नक्षत्र: रेवती · तिथि: शुक्ल तृतीया

मार्च 2066 · 6 दिन

तारीखमुहूर्त
बुधवार, 3 मार्च
13:56 – 19:00
नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: शुक्ल सप्तमी
गुरुवार, 11 मार्च
04:18 (12 मार्च) – 06:34 (12 मार्च)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा
शुक्रवार, 12 मार्च
06:34 – 03:07 (13 मार्च)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
शनिवार, 13 मार्च
01:57 (14 मार्च) – 06:31 (14 मार्च)
नक्षत्र: चित्रा · तिथि: कृष्ण तृतीया
बुधवार, 17 मार्च
16:05 – 19:58
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण सप्तमी
शनिवार, 20 मार्च
16:15 – 06:23 (21 मार्च)
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: कृष्ण दशमी

अप्रैल 2066 · 2 दिन

तारीखमुहूर्त
बुधवार, 28 अप्रैल
02:19 (29 अप्रैल) – 05:42 (29 अप्रैल)
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल पंचमी
गुरुवार, 29 अप्रैल
05:42 – 11:37
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल पंचमी

मई 2066 · 9 दिन

तारीखमुहूर्त
बुधवार, 5 मई
23:15 – 05:36 (6 मई)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: शुक्ल एकादशी
गुरुवार, 6 मई
05:36 – 10:52
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: शुक्ल एकादशी
शुक्रवार, 7 मई
21:16 – 05:35 (8 मई)
नक्षत्र: चित्रा · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
शनिवार, 8 मई
05:35 – 06:44
नक्षत्र: चित्रा · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
सोमवार, 10 मई
14:17 – 05:32 (11 मई)
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
गुरुवार, 13 मई
04:30 (14 मई) – 05:31 (14 मई)
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: कृष्ण पंचमी
शुक्रवार, 14 मई
05:31 – 08:10
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: कृष्ण पंचमी
बुधवार, 19 मई
05:28 – 02:52 (20 मई)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण एकादशी
बुधवार, 26 मई
05:25 – 18:12
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया

जून 2066 · 6 दिन

तारीखमुहूर्त
बुधवार, 2 जून
00:23 (3 जून) – 05:23 (3 जून)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: शुक्ल दशमी
गुरुवार, 3 जून
05:23 – 07:54
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: शुक्ल दशमी
शुक्रवार, 4 जून
07:09 – 21:09
नक्षत्र: चित्रा · तिथि: शुक्ल एकादशी
गुरुवार, 10 जून
13:41 – 21:11
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: कृष्ण तृतीया
बुधवार, 16 जून
12:55 – 05:23 (17 जून)
नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण दशमी
गुरुवार, 17 जून
05:23 – 10:34
नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण दशमी

जुलाई 2066 · 0 दिन

जुलाई में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

अगस्त 2066 · 0 दिन

अगस्त में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

सितंबर 2066 · 0 दिन

सितंबर में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

अक्टूबर 2066 · 3 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 21 अक्टू॰
13:35 – 00:36 (22 अक्टू॰)
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल तृतीया
सोमवार, 25 अक्टू॰
07:08 – 15:22
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: शुक्ल सप्तमी
शनिवार, 30 अक्टू॰
08:06 – 06:32 (31 अक्टू॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवती · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी

नवंबर 2066 · 7 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 4 नव॰
07:29 – 06:36 (5 नव॰)
नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया
शुक्रवार, 5 नव॰
06:36 – 11:56
नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा · तिथि: कृष्ण तृतीया
शुक्रवार, 12 नव॰
03:35 (13 नव॰) – 06:42 (13 नव॰)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण एकादशी
शनिवार, 13 नव॰
06:42 – 02:10 (14 नव॰)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण एकादशी
गुरुवार, 18 नव॰
15:38 – 20:38
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल द्वितीया
शुक्रवार, 26 नव॰
08:33 – 06:53 (27 नव॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
शनिवार, 27 नव॰
06:53 – 20:22
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवती · तिथि: शुक्ल एकादशी

दिसंबर 2066 · 0 दिन

दिसंबर में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

नई दिल्ली के लिए गणना। समय-अवधियां स्थानीय समय में दिखाई गई हैं; जो अवधि मध्यरात्रि पार करती है, वह उसी दिन की मानी जाती है जिस दिन वह शुरू होती है (हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है)।

प्रयुक्त नियम

गृह प्रवेश, यानी नए घर में पहली बार प्रवेश, गृहस्थी के सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है, और मुहूर्त चिंतामणि में इसके लिए अलग नियम दिए गए हैं। अच्छे मुहूर्त में स्थिर या मृदु नक्षत्र, अनुकूल तिथि और वार, और मुहूर्त चिंतामणि द्वारा सुझाए गए चंद्र मासों में से कोई एक होना चाहिए; जिन महीनों में शुक्र या गुरु अस्त हों, उनसे बचा जाता है।

  • चंद्रमा का नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
  • तिथि (शुक्ल पक्ष): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी; (कृष्ण पक्ष): प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी
  • वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार
  • चंद्र मास (अमांत): माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक, मार्गशीर्ष
  • अधिक मास (मलमास) में कोई मुहूर्त नहीं
  • शुक्र या गुरु के अस्त (तारा अस्त) रहने पर, और अस्त होने से पहले तथा उदय होने के बाद के 3 दिनों में कोई मुहूर्त नहीं

ये सामान्य रूप से शुभ समय-अवधियां हैं। किसी संस्कार के लिए ज्योतिषी चुने गए क्षण का लग्न और संबंधित व्यक्तियों का तारा बल व चंद्र बल भी देखते हैं — एक ही अवधि किसी एक व्यक्ति के लिए दूसरे की तुलना में अधिक अनुकूल हो सकती है।

ज्योतिषी से अपना व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवाएं किसी अनुभवी ज्योतिषी से बात करें।

ज्योतिषी से बात करें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2066 में गृह प्रवेश के कितने मुहूर्त हैं?

इस पेज पर दिए गए नियमों के अनुसार 2066 में नई दिल्ली के लिए गृह प्रवेश के 45 शुभ दिन हैं।

गृह प्रवेश के लिए अगली शुभ तिथि कब है?

अगली शुभ तिथि शुक्रवार, 29 जनवरी 2066 है, मुहूर्त 19:45 – 07:10 (30 जन॰)।

कुछ महीनों में कोई मुहूर्त क्यों नहीं होता?

मौसमी निषेधों के कारण लंबी अवधियां वर्जित हो जाती हैं: खरमास (सूर्य धनु या मीन राशि में), चातुर्मास, अधिक मास, और वे अवधियां जब शुक्र या गुरु अस्त होते हैं। बचे हुए दिनों में भी उपयुक्त नक्षत्र और तिथि का एक साथ होना ज़रूरी है।