27 नवंबर 2066 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 27 नवंबर 2066, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 27 नवंबर 2066 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (20:22 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (08:53 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:53 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 09:30 से 10:49 तक है।

दिन और रात
दिन 06:53 – 17:24
रात 06:53 तक
तिथि
एकादशी, 20:22 तक
द्वादशी
नक्षत्र
रेवती
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 नवंबर 2066 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 20:22 तक
शुक्ल द्वादशी 20:47, 28 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 09:40, 28 नव॰ तक
योग
सिद्धि 19:39 तक
व्यतीपातअशुभ 18:47, 28 नव॰ तक
करण
वणिज 08:20 तक
विष्टि (भद्रा) 20:22 तक
बव 08:31, 28 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:53
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
14:17
चंद्रास्त
02:34
दिनमान
10h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2123
शक संवत
1988, व्यय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:05 – 05:59
अभिजीत मुहूर्त
11:47 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
09:30 – 10:49
यमगंड
13:27 – 14:46
गुलिक काल
06:53 – 08:12

27 नवंबर 2066 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:53 – 08:12टालें
शुभ08:12 – 09:30शुभ
रोग09:30 – 10:49टालें
उद्वेग10:49 – 12:08टालें
चर12:08 – 13:27सामान्य
लाभ13:27 – 14:46शुभ
अमृत14:46 – 16:05शुभ
काल16:05 – 17:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:24 – 19:05शुभ
उद्वेग19:05 – 20:46टालें
शुभ20:46 – 22:27शुभ
अमृत22:27 – 00:09शुभ
चर00:09 – 01:50सामान्य
रोग01:50 – 03:31टालें
काल03:31 – 05:12टालें
लाभ05:12 – 06:53शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:5307:45दिन
गुरु07:4508:38दिन
मंगल08:3809:30दिन
सूर्य09:3010:23दिन
शुक्र10:2311:16दिन
बुध11:1612:08दिन
चंद्र12:0813:01दिन
शनि13:0113:53दिन
गुरु13:5314:46दिन
मंगल14:4615:38दिन
सूर्य15:3816:31दिन
शुक्र16:3117:24दिन
बुध17:2418:31रात
चंद्र18:3119:39रात
शनि19:3920:46रात
गुरु20:4621:54रात
मंगल21:5423:01रात
सूर्य23:0100:09रात
शुक्र00:0901:16रात
बुध01:1602:24रात
चंद्र02:2403:31रात
शनि03:3104:39रात
गुरु04:3905:46रात
मंगल05:4606:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 नव॰ 2066शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 नव॰ 2066प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 दिस॰ 2066मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
6 दिस॰ 2066संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 दिस॰ 2066कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 दिस॰ 2066कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 दिस॰ 2066प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 दिस॰ 2066पौष अमावस्याअमावस्या
16 दिस॰ 2066धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2066विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7918° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।