8 मई 2066 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 8 मई 2066, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 8 मई 2066 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (06:44 तक), नक्षत्र चित्रा (19:19 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 19:00 पर है। राहुकाल 08:56 से 10:37 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 19:00
रात 05:34 तक
तिथि
चतुर्दशी, 03:47 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
चित्रा, 19:19 तक
स्वाति
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 मई 2066 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 06:44 तक
शुक्ल चतुर्दशी 03:47, 9 मई तक
पूर्णिमा 00:28, 10 मई तक
नक्षत्र
चित्रा 19:19 तक
स्वाति 16:56, 9 मई तक
योग
सिद्धि 00:08, 9 मई तक
व्यतीपातअशुभ 20:22, 9 मई तक
करण
तैतिल 06:44 तक
गर 17:19 तक
वणिज 03:47, 9 मई तक
विष्टि (भद्रा) 14:10, 9 मई तक
चंद्र राशि
कन्या 08:22 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
19:00
चंद्रोदय
17:37
चंद्रास्त
04:00
दिनमान
13h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2123
शक संवत
1988, व्यय संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
08:56 – 10:37
यमगंड
13:58 – 15:39
गुलिक काल
05:35 – 07:15

8 मई 2066 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:35 – 07:15टालें
शुभ07:15 – 08:56शुभ
रोग08:56 – 10:37टालें
उद्वेग10:37 – 12:17टालें
चर12:17 – 13:58सामान्य
लाभ13:58 – 15:39शुभ
अमृत15:39 – 17:20शुभ
काल17:20 – 19:00टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:00 – 20:19शुभ
उद्वेग20:19 – 21:39टालें
शुभ21:39 – 22:58शुभ
अमृत22:58 – 00:17शुभ
चर00:17 – 01:36सामान्य
रोग01:36 – 02:55टालें
काल02:55 – 04:15टालें
लाभ04:15 – 05:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3506:42दिन
गुरु06:4207:49दिन
मंगल07:4908:56दिन
सूर्य08:5610:03दिन
शुक्र10:0311:10दिन
बुध11:1012:17दिन
चंद्र12:1713:25दिन
शनि13:2514:32दिन
गुरु14:3215:39दिन
मंगल15:3916:46दिन
सूर्य16:4617:53दिन
शुक्र17:5319:00दिन
बुध19:0019:53रात
चंद्र19:5320:46रात
शनि20:4621:39रात
गुरु21:3922:31रात
मंगल22:3123:24रात
सूर्य23:2400:17रात
शुक्र00:1701:10रात
बुध01:1002:03रात
चंद्र02:0302:55रात
शनि02:5503:48रात
गुरु03:4804:41रात
मंगल04:4105:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 मई 2066प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 मई 2066वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
13 मई 2066संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 मई 2066वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2066कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
19 मई 2066कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 मई 2066प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 मई 2066ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
28 मई 2066विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 जून 2066शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 जून 2066प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7840° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।