20 जनवरी 2026 को अबू धाबी का पंचांग

मंगलवार, 20 जनवरी 2026, अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को अबू धाबी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (01:13, 21 जन॰ तक), नक्षत्र श्रवण (11:37 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 15:16 से 16:37 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 17:59
रात 07:07 तक
तिथि
द्वितीया, 01:13 तक
तृतीया
नक्षत्र
श्रवण, 11:37 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जनवरी 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 01:13, 21 जन॰ तक
शुक्ल तृतीया 01:17, 22 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 11:37 तक
धनिष्ठा 12:28, 21 जन॰ तक
योग
सिद्धि 18:31 तक
व्यतीपातअशुभ 17:28, 21 जन॰ तक
करण
बालव 13:01 तक
कौलव 01:13, 21 जन॰ तक
तैतिल 13:18, 21 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 00:05, 21 जन॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
08:14
चंद्रास्त
19:31
दिनमान
10h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:22 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
15:16 – 16:37
यमगंड
09:50 – 11:12
गुलिक काल
12:33 – 13:54

20 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:07 – 08:29टालें
उद्वेग08:29 – 09:50टालें
चर09:50 – 11:12सामान्य
लाभ11:12 – 12:33शुभ
अमृत12:33 – 13:54शुभ
काल13:54 – 15:16टालें
शुभ15:16 – 16:37शुभ
रोग16:37 – 17:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:59 – 19:37टालें
लाभ19:37 – 21:16शुभ
उद्वेग21:16 – 22:54टालें
शुभ22:54 – 00:33शुभ
अमृत00:33 – 02:11शुभ
चर02:11 – 03:50सामान्य
रोग03:50 – 05:29टालें
काल05:29 – 07:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:0708:02दिन
सूर्य08:0208:56दिन
शुक्र08:5609:50दिन
बुध09:5010:44दिन
चंद्र10:4411:39दिन
शनि11:3912:33दिन
गुरु12:3313:27दिन
मंगल13:2714:22दिन
सूर्य14:2215:16दिन
शुक्र15:1616:10दिन
बुध16:1017:04दिन
चंद्र17:0417:59दिन
शनि17:5919:04रात
गुरु19:0420:10रात
मंगल20:1021:16रात
सूर्य21:1622:21रात
शुक्र22:2123:27रात
बुध23:2700:33रात
चंद्र00:3301:39रात
शनि01:3902:44रात
गुरु02:4403:50रात
मंगल03:5004:56रात
सूर्य04:5606:01रात
शुक्र06:0107:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां अबू धाबी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2210° (लाहिड़ी)। समय अबू धाबी (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।