15 जनवरी 2027 को अबू धाबी का पंचांग

शुक्रवार, 15 जनवरी 2027, अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को अबू धाबी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (12:43 तक), नक्षत्र रेवती (22:21 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 07:08 पर और सूर्यास्त 17:55 पर है। राहुकाल 11:10 से 12:31 तक है।

दिन और रात
दिन 07:08 – 17:55
रात 07:08 तक
तिथि
सप्तमी, 12:43 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रेवती, 22:21 तक
अश्विनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जनवरी 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 12:43 तक
शुक्ल अष्टमी 12:13, 16 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 22:21 तक
अश्विनी 22:09, 16 जन॰ तक
योग
शिव 14:48 तक
सिद्ध 13:08, 16 जन॰ तक
करण
वणिज 12:43 तक
विष्टि (भद्रा) 00:34, 16 जन॰ तक
बव 12:13, 16 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 22:21 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:08
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
11:24
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:22 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
12:10 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
11:10 – 12:31
यमगंड
15:13 – 16:34
गुलिक काल
08:29 – 09:49

15 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:08 – 08:29सामान्य
लाभ08:29 – 09:49शुभ
अमृत09:49 – 11:10शुभ
काल11:10 – 12:31टालें
शुभ12:31 – 13:52शुभ
रोग13:52 – 15:13टालें
उद्वेग15:13 – 16:34टालें
चर16:34 – 17:55सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:55 – 19:34टालें
काल19:34 – 21:13टालें
लाभ21:13 – 22:52शुभ
उद्वेग22:52 – 00:31टालें
शुभ00:31 – 02:10शुभ
अमृत02:10 – 03:49शुभ
चर03:49 – 05:29सामान्य
रोग05:29 – 07:08टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0808:02दिन
बुध08:0208:56दिन
चंद्र08:5609:49दिन
शनि09:4910:43दिन
गुरु10:4311:37दिन
मंगल11:3712:31दिन
सूर्य12:3113:25दिन
शुक्र13:2514:19दिन
बुध14:1915:13दिन
चंद्र15:1316:07दिन
शनि16:0717:01दिन
गुरु17:0117:55दिन
मंगल17:5519:01रात
सूर्य19:0120:07रात
शुक्र20:0721:13रात
बुध21:1322:19रात
चंद्र22:1923:25रात
शनि23:2500:31रात
गुरु00:3101:37रात
मंगल01:3702:43रात
सूर्य02:4303:49रात
शुक्र03:4904:56रात
बुध04:5606:02रात
चंद्र06:0207:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां अबू धाबी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2348° (लाहिड़ी)। समय अबू धाबी (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।