19 अक्टूबर 2026 को अटलांटा का पंचांग

सोमवार, 19 अक्टूबर 2026, अटलांटा, संयुक्त राज्य। समय America/New_York में है।

सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को अटलांटा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (03:20, 20 अक्टू॰ तक), नक्षत्र श्रवण (08:32, 20 अक्टू॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:45 पर और सूर्यास्त 18:58 पर है। राहुकाल 09:09 से 10:33 तक है।

दिन और रात
दिन 07:45 – 18:58
रात 07:46 तक
तिथि
नवमी, 03:20 तक
दशमी
नक्षत्र
श्रवण
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल नवमी 03:20, 20 अक्टू॰ तक
शुक्ल दशमी 04:42, 21 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 08:32, 20 अक्टू॰ तक
योग
धृति 15:05 तक
शूलअशुभ 15:20, 20 अक्टू॰ तक
करण
बालव 14:25 तक
कौलव 03:20, 20 अक्टू॰ तक
तैतिल 16:06, 20 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:45
सूर्यास्त
18:58
चंद्रोदय
15:27
चंद्रास्त
01:01
दिनमान
11h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
06:03 – 06:54
अभिजीत मुहूर्त
12:59 – 13:44

अशुभ समय

राहुकाल
09:09 – 10:33
यमगंड
11:58 – 13:22
गुलिक काल
14:46 – 16:10

19 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:45 – 09:09शुभ
काल09:09 – 10:33टालें
शुभ10:33 – 11:58शुभ
रोग11:58 – 13:22टालें
उद्वेग13:22 – 14:46टालें
चर14:46 – 16:10सामान्य
लाभ16:10 – 17:34शुभ
अमृत17:34 – 18:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:58 – 20:34सामान्य
रोग20:34 – 22:10टालें
काल22:10 – 23:46टालें
लाभ23:46 – 01:22शुभ
उद्वेग01:22 – 02:58टालें
शुभ02:58 – 04:34शुभ
अमृत04:34 – 06:10शुभ
चर06:10 – 07:46सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:4508:41दिन
शनि08:4109:37दिन
गुरु09:3710:33दिन
मंगल10:3311:30दिन
सूर्य11:3012:26दिन
शुक्र12:2613:22दिन
बुध13:2214:18दिन
चंद्र14:1815:14दिन
शनि15:1416:10दिन
गुरु16:1017:06दिन
मंगल17:0618:02दिन
सूर्य18:0218:58दिन
शुक्र18:5820:02रात
बुध20:0221:06रात
चंद्र21:0622:10रात
शनि22:1023:14रात
गुरु23:1400:18रात
मंगल00:1801:22रात
सूर्य01:2202:26रात
शुक्र02:2603:30रात
बुध03:3004:34रात
चंद्र04:3405:38रात
शनि05:3806:42रात
गुरु06:4207:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां अटलांटा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2314° (लाहिड़ी)। समय अटलांटा (America/New_York) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।