4 सितंबर 2028 को अटलांटा का पंचांग

सोमवार, 4 सितंबर 2028, अटलांटा, संयुक्त राज्य। समय America/New_York में है।

सोमवार, 4 सितंबर 2028 को अटलांटा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (22:14 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (03:23, 5 सित॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:13 पर और सूर्यास्त 19:58 पर है। राहुकाल 08:49 से 10:24 तक है।

दिन और रात
दिन 07:13 – 19:58
रात 07:14 तक
तिथि
प्रतिपदा, 22:14 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 03:23 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 सितंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 22:14 तक
कृष्ण द्वितीया 00:39, 6 सित॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 03:23, 5 सित॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 06:19, 6 सित॰ तक
योग
धृति 16:47 तक
शूलअशुभ 17:42, 5 सित॰ तक
करण
बालव 09:01 तक
कौलव 22:14 तक
तैतिल 11:27, 5 सित॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 20:38 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:13
सूर्यास्त
19:58
चंद्रोदय
20:05
चंद्रास्त
07:47
दिनमान
12h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:43 – 06:28
अभिजीत मुहूर्त
13:10 – 14:01

अशुभ समय

राहुकाल
08:49 – 10:24
यमगंड
12:00 – 13:36
गुलिक काल
15:11 – 16:47

4 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:13 – 08:49शुभ
काल08:49 – 10:24टालें
शुभ10:24 – 12:00शुभ
रोग12:00 – 13:36टालें
उद्वेग13:36 – 15:11टालें
चर15:11 – 16:47सामान्य
लाभ16:47 – 18:22शुभ
अमृत18:22 – 19:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:58 – 21:22सामान्य
रोग21:22 – 22:47टालें
काल22:47 – 00:11टालें
लाभ00:11 – 01:36शुभ
उद्वेग01:36 – 03:00टालें
शुभ03:00 – 04:25शुभ
अमृत04:25 – 05:50शुभ
चर05:50 – 07:14सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1308:17दिन
शनि08:1709:21दिन
गुरु09:2110:24दिन
मंगल10:2411:28दिन
सूर्य11:2812:32दिन
शुक्र12:3213:36दिन
बुध13:3614:39दिन
चंद्र14:3915:43दिन
शनि15:4316:47दिन
गुरु16:4717:50दिन
मंगल17:5018:54दिन
सूर्य18:5419:58दिन
शुक्र19:5820:54रात
बुध20:5421:50रात
चंद्र21:5022:47रात
शनि22:4723:43रात
गुरु23:4300:40रात
मंगल00:4001:36रात
सूर्य01:3602:32रात
शुक्र02:3203:29रात
बुध03:2904:25रात
चंद्र04:2505:21रात
शनि05:2106:18रात
गुरु06:1807:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
21 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां अटलांटा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2577° (लाहिड़ी)। समय अटलांटा (America/New_York) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।