20 नवंबर 2025 को अयोध्या का पंचांग

गुरुवार, 20 नवंबर 2025, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 20 नवंबर 2025 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (12:17 तक), नक्षत्र विशाखा (10:58 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:24 पर और सूर्यास्त 17:08 पर है। राहुकाल 13:07 से 14:27 तक है।

दिन और रात
दिन 06:24 – 17:08
रात 06:25 तक
तिथि
अमावस्या, 12:17 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
विशाखा, 10:58 तक
अनुराधा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 नवंबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
अमावस्या 12:17 तक
शुक्ल प्रतिपदा 14:47, 21 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 10:58 तक
अनुराधा 13:56, 21 नव॰ तक
योग
शोभन 09:52 तक
अतिगंडअशुभ 10:43, 21 नव॰ तक
करण
नाग 12:17 तक
किंस्तुघ्न 01:33, 21 नव॰ तक
बव 14:47, 21 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:24
सूर्यास्त
17:08
चंद्रोदय
06:22
चंद्रास्त
16:56
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
11:25 – 12:08

अशुभ समय

राहुकाल
13:07 – 14:27
यमगंड
06:24 – 07:44
गुलिक काल
09:05 – 10:26

20 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:24 – 07:44शुभ
रोग07:44 – 09:05टालें
उद्वेग09:05 – 10:26टालें
चर10:26 – 11:46सामान्य
लाभ11:46 – 13:07शुभ
अमृत13:07 – 14:27शुभ
काल14:27 – 15:48टालें
शुभ15:48 – 17:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:08 – 18:48शुभ
चर18:48 – 20:28सामान्य
रोग20:28 – 22:07टालें
काल22:07 – 23:47टालें
लाभ23:47 – 01:26शुभ
उद्वेग01:26 – 03:06टालें
शुभ03:06 – 04:45शुभ
अमृत04:45 – 06:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:2407:18दिन
मंगल07:1808:11दिन
सूर्य08:1109:05दिन
शुक्र09:0509:59दिन
बुध09:5910:52दिन
चंद्र10:5211:46दिन
शनि11:4612:40दिन
गुरु12:4013:34दिन
मंगल13:3414:27दिन
सूर्य14:2715:21दिन
शुक्र15:2116:15दिन
बुध16:1517:08दिन
चंद्र17:0818:15रात
शनि18:1519:21रात
गुरु19:2120:28रात
मंगल20:2821:34रात
सूर्य21:3422:40रात
शुक्र22:4023:47रात
बुध23:4700:53रात
चंद्र00:5301:59रात
शनि01:5903:06रात
गुरु03:0604:12रात
मंगल04:1205:18रात
सूर्य05:1806:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2187° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।