9 फ़रवरी 2028 को अयोध्या का पंचांग

बुधवार, 9 फ़रवरी 2028, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 9 फ़रवरी 2028 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (00:17, 10 फ़र॰ तक), नक्षत्र पुनर्वसु (06:50 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 17:48 पर है। राहुकाल 12:15 से 13:38 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 17:48
रात 06:41 तक
तिथि
चतुर्दशी, 00:17 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
पुष्य, 04:03 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 00:17, 10 फ़र॰ तक
पूर्णिमा 20:33, 10 फ़र॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 04:03, 10 फ़र॰ तक
आश्लेषा 01:03, 11 फ़र॰ तक
योग
आयुष्मान 23:26 तक
सौभाग्य 19:09, 10 फ़र॰ तक
करण
गर 14:04 तक
वणिज 00:17, 10 फ़र॰ तक
विष्टि (भद्रा) 10:26, 10 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
17:48
चंद्रोदय
16:28
चंद्रास्त
05:26
दिनमान
11h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:59 – 05:50
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:37 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:15 – 13:38
यमगंड
08:05 – 09:28
गुलिक काल
10:52 – 12:15

9 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:42 – 08:05शुभ
अमृत08:05 – 09:28शुभ
काल09:28 – 10:52टालें
शुभ10:52 – 12:15शुभ
रोग12:15 – 13:38टालें
उद्वेग13:38 – 15:02टालें
चर15:02 – 16:25सामान्य
लाभ16:25 – 17:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:48 – 19:25टालें
शुभ19:25 – 21:01शुभ
अमृत21:01 – 22:38शुभ
चर22:38 – 00:15सामान्य
रोग00:15 – 01:51टालें
काल01:51 – 03:28टालें
लाभ03:28 – 05:05शुभ
उद्वेग05:05 – 06:41टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4207:37दिन
चंद्र07:3708:33दिन
शनि08:3309:28दिन
गुरु09:2810:24दिन
मंगल10:2411:19दिन
सूर्य11:1912:15दिन
शुक्र12:1513:11दिन
बुध13:1114:06दिन
चंद्र14:0615:02दिन
शनि15:0215:57दिन
गुरु15:5716:53दिन
मंगल16:5317:48दिन
सूर्य17:4818:53रात
शुक्र18:5319:57रात
बुध19:5721:01रात
चंद्र21:0122:06रात
शनि22:0623:10रात
गुरु23:1000:15रात
मंगल00:1501:19रात
सूर्य01:1902:23रात
शुक्र02:2303:28रात
बुध03:2804:32रात
चंद्र04:3205:37रात
शनि05:3706:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2497° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।