22 अप्रैल 2028 को अयोध्या का पंचांग

शनिवार, 22 अप्रैल 2028, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 22 अप्रैल 2028 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (22:56 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (02:31, 23 अप्रैल तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 18:29 पर है। राहुकाल 08:45 से 10:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 18:29
रात 05:29 तक
तिथि
त्रयोदशी, 22:56 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 02:31 तक
रेवती
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अप्रैल 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 22:56 तक
कृष्ण चतुर्दशी 00:21, 24 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 02:31, 23 अप्रैल तक
रेवती 04:27, 24 अप्रैल तक
योग
इंद्र 10:06 तक
वैधृतिअशुभ 10:23, 23 अप्रैल तक
करण
गर 10:03 तक
वणिज 22:56 तक
विष्टि (भद्रा) 11:42, 23 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
18:29
चंद्रोदय
03:42
चंद्रास्त
16:23
दिनमान
12h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:46
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:25

अशुभ समय

राहुकाल
08:45 – 10:22
यमगंड
13:37 – 15:14
गुलिक काल
05:30 – 07:07

22 अप्रैल 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:30 – 07:07टालें
शुभ07:07 – 08:45शुभ
रोग08:45 – 10:22टालें
उद्वेग10:22 – 11:59टालें
चर11:59 – 13:37सामान्य
लाभ13:37 – 15:14शुभ
अमृत15:14 – 16:51शुभ
काल16:51 – 18:29टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:29 – 19:51शुभ
उद्वेग19:51 – 21:14टालें
शुभ21:14 – 22:36शुभ
अमृत22:36 – 23:59शुभ
चर23:59 – 01:21सामान्य
रोग01:21 – 02:44टालें
काल02:44 – 04:07टालें
लाभ04:07 – 05:29शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3006:35दिन
गुरु06:3507:40दिन
मंगल07:4008:45दिन
सूर्य08:4509:50दिन
शुक्र09:5010:54दिन
बुध10:5411:59दिन
चंद्र11:5913:04दिन
शनि13:0414:09दिन
गुरु14:0915:14दिन
मंगल15:1416:19दिन
सूर्य16:1917:24दिन
शुक्र17:2418:29दिन
बुध18:2919:24रात
चंद्र19:2420:19रात
शनि20:1921:14रात
गुरु21:1422:09रात
मंगल22:0923:04रात
सूर्य23:0423:59रात
शुक्र23:5900:54रात
बुध00:5401:49रात
चंद्र01:4902:44रात
शनि02:4403:39रात
गुरु03:3904:34रात
मंगल04:3405:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 अप्रैल 2028वैशाख अमावस्याअमावस्या
28 अप्रैल 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 मई 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 मई 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 मई 2028वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
12 मई 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मई 2028वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 मई 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2525° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।