23 अप्रैल 2028 को अयोध्या का पंचांग

रविवार, 23 अप्रैल 2028, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 23 अप्रैल 2028 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (00:21, 24 अप्रैल तक), नक्षत्र रेवती (04:27, 24 अप्रैल तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 18:29 पर है। राहुकाल 16:52 से 18:29 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 18:29
रात 05:28 तक
तिथि
चतुर्दशी, 00:21 तक
अमावस्या
नक्षत्र
रेवती, 04:27 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अप्रैल 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 00:21, 24 अप्रैल तक
अमावस्या 01:16, 25 अप्रैल तक
नक्षत्र
रेवती 04:27, 24 अप्रैल तक
अश्विनी 05:54, 25 अप्रैल तक
योग
वैधृतिअशुभ 10:23 तक
विष्कंभअशुभ 10:18, 24 अप्रैल तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:42 तक
शकुनि 00:21, 24 अप्रैल तक
चतुष्पद 12:52, 24 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मीन 04:27, 24 अप्रैल तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
18:29
चंद्रोदय
04:12
चंद्रास्त
17:17
दिनमान
13h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:01 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:25

अशुभ समय

राहुकाल
16:52 – 18:29
यमगंड
11:59 – 13:37
गुलिक काल
15:14 – 16:52

23 अप्रैल 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:29 – 07:07टालें
चर07:07 – 08:44सामान्य
लाभ08:44 – 10:22शुभ
अमृत10:22 – 11:59शुभ
काल11:59 – 13:37टालें
शुभ13:37 – 15:14शुभ
रोग15:14 – 16:52टालें
उद्वेग16:52 – 18:29टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:29 – 19:52शुभ
अमृत19:52 – 21:14शुभ
चर21:14 – 22:36सामान्य
रोग22:36 – 23:59टालें
काल23:59 – 01:21टालें
लाभ01:21 – 02:43शुभ
उद्वेग02:43 – 04:06टालें
शुभ04:06 – 05:28शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2906:34दिन
शुक्र06:3407:39दिन
बुध07:3908:44दिन
चंद्र08:4409:49दिन
शनि09:4910:54दिन
गुरु10:5411:59दिन
मंगल11:5913:04दिन
सूर्य13:0414:09दिन
शुक्र14:0915:14दिन
बुध15:1416:19दिन
चंद्र16:1917:24दिन
शनि17:2418:29दिन
गुरु18:2919:24रात
मंगल19:2420:19रात
सूर्य20:1921:14रात
शुक्र21:1422:09रात
बुध22:0923:04रात
चंद्र23:0423:59रात
शनि23:5900:54रात
गुरु00:5401:49रात
मंगल01:4902:43रात
सूर्य02:4303:38रात
शुक्र03:3804:33रात
बुध04:3305:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 अप्रैल 2028वैशाख अमावस्याअमावस्या
28 अप्रैल 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 मई 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 मई 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 मई 2028वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
12 मई 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मई 2028वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 मई 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 मई 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2525° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।