17 अक्टूबर 2028 को अयोध्या का पंचांग

मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (12:05 तक), नक्षत्र हस्त (20:16 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 17:30 पर है। राहुकाल 14:38 से 16:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 17:30
रात 06:02 तक
तिथि
चतुर्दशी, 12:05 तक
अमावस्या
नक्षत्र
हस्त, 20:16 तक
चित्रा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 12:05 तक
अमावस्या 08:26, 18 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 20:16 तक
चित्रा 17:28, 18 अक्टू॰ तक
योग
इंद्र 09:38 तक
वैधृतिअशुभ 05:27, 18 अक्टू॰ तक
विष्कंभअशुभ 01:26, 19 अक्टू॰ तक
करण
शकुनि 12:05 तक
चतुष्पद 22:15 तक
नाग 08:26, 18 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
17:30
चंद्रोदय
04:54
चंद्रास्त
16:41
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
11:23 – 12:09

अशुभ समय

राहुकाल
14:38 – 16:04
यमगंड
08:54 – 10:20
गुलिक काल
11:46 – 13:12

17 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:01 – 07:27टालें
उद्वेग07:27 – 08:54टालें
चर08:54 – 10:20सामान्य
लाभ10:20 – 11:46शुभ
अमृत11:46 – 13:12शुभ
काल13:12 – 14:38टालें
शुभ14:38 – 16:04शुभ
रोग16:04 – 17:30टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:30 – 19:04टालें
लाभ19:04 – 20:38शुभ
उद्वेग20:38 – 22:12टालें
शुभ22:12 – 23:46शुभ
अमृत23:46 – 01:20शुभ
चर01:20 – 02:54सामान्य
रोग02:54 – 04:28टालें
काल04:28 – 06:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0106:59दिन
सूर्य06:5907:56दिन
शुक्र07:5608:54दिन
बुध08:5409:51दिन
चंद्र09:5110:48दिन
शनि10:4811:46दिन
गुरु11:4612:43दिन
मंगल12:4313:41दिन
सूर्य13:4114:38दिन
शुक्र14:3815:35दिन
बुध15:3516:33दिन
चंद्र16:3317:30दिन
शनि17:3018:33रात
गुरु18:3319:36रात
मंगल19:3620:38रात
सूर्य20:3821:41रात
शुक्र21:4122:43रात
बुध22:4323:46रात
चंद्र23:4600:49रात
शनि00:4901:51रात
गुरु01:5102:54रात
मंगल02:5403:57रात
सूर्य03:5704:59रात
शुक्र04:5906:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2593° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।