29 सितंबर 2029 को अयोध्या का पंचांग

शनिवार, 29 सितंबर 2029, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 29 सितंबर 2029 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (12:04 तक), नक्षत्र रोहिणी (10:29 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 17:49 पर है। राहुकाल 08:52 से 10:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 17:49
रात 05:53 तक
तिथि
षष्ठी, 12:04 तक
सप्तमी
नक्षत्र
रोहिणी, 10:29 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 12:04 तक
कृष्ण सप्तमी 13:49, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 10:29 तक
मृगशिरा 12:48, 30 सित॰ तक
योग
सिद्धि 06:40 तक
व्यतीपातअशुभ 07:06, 30 सित॰ तक
करण
वणिज 12:04 तक
विष्टि (भद्रा) 01:01, 30 सित॰ तक
बव 13:49, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 23:43 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
17:49
चंद्रोदय
22:06
चंद्रास्त
11:27
दिनमान
11h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
08:52 – 10:21
यमगंड
13:20 – 14:50
गुलिक काल
05:52 – 07:22

29 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:52 – 07:22टालें
शुभ07:22 – 08:52शुभ
रोग08:52 – 10:21टालें
उद्वेग10:21 – 11:51टालें
चर11:51 – 13:20सामान्य
लाभ13:20 – 14:50शुभ
अमृत14:50 – 16:20शुभ
काल16:20 – 17:49टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:49 – 19:20शुभ
उद्वेग19:20 – 20:50टालें
शुभ20:50 – 22:21शुभ
अमृत22:21 – 23:51शुभ
चर23:51 – 01:21सामान्य
रोग01:21 – 02:52टालें
काल02:52 – 04:22टालें
लाभ04:22 – 05:53शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5206:52दिन
गुरु06:5207:52दिन
मंगल07:5208:52दिन
सूर्य08:5209:51दिन
शुक्र09:5110:51दिन
बुध10:5111:51दिन
चंद्र11:5112:51दिन
शनि12:5113:50दिन
गुरु13:5014:50दिन
मंगल14:5015:50दिन
सूर्य15:5016:50दिन
शुक्र16:5017:49दिन
बुध17:4918:50रात
चंद्र18:5019:50रात
शनि19:5020:50रात
गुरु20:5021:50रात
मंगल21:5022:51रात
सूर्य22:5123:51रात
शुक्र23:5100:51रात
बुध00:5101:52रात
चंद्र01:5202:52रात
शनि02:5203:52रात
गुरु03:5204:52रात
मंगल04:5205:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2726° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।