7 अक्टूबर 2029 को अयोध्या का पंचांग

रविवार, 7 अक्टूबर 2029, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 7 अक्टूबर 2029 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (00:44, 8 अक्टू॰ तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (08:06 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 17:41 पर है। राहुकाल 16:13 से 17:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 17:41
रात 05:57 तक
तिथि
अमावस्या, 00:44 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
हस्त, 05:09 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
अमावस्या 00:44, 8 अक्टू॰ तक
शुक्ल प्रतिपदा 20:55, 8 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 05:09, 8 अक्टू॰ तक
चित्रा 02:07, 9 अक्टू॰ तक
योग
ब्रह्म 13:17 तक
इंद्र 09:02, 8 अक्टू॰ तक
करण
चतुष्पद 14:37 तक
नाग 00:44, 8 अक्टू॰ तक
किंस्तुघ्न 10:50, 8 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
17:41
चंद्रोदय
05:10
चंद्रास्त
17:06
दिनमान
11h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:25 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
16:13 – 17:41
यमगंड
11:48 – 13:16
गुलिक काल
14:44 – 16:13

7 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:56 – 07:24टालें
चर07:24 – 08:52सामान्य
लाभ08:52 – 10:20शुभ
अमृत10:20 – 11:48शुभ
काल11:48 – 13:16टालें
शुभ13:16 – 14:44शुभ
रोग14:44 – 16:13टालें
उद्वेग16:13 – 17:41टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:41 – 19:13शुभ
अमृत19:13 – 20:45शुभ
चर20:45 – 22:17सामान्य
रोग22:17 – 23:49टालें
काल23:49 – 01:21टालें
लाभ01:21 – 02:53शुभ
उद्वेग02:53 – 04:25टालें
शुभ04:25 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5606:55दिन
शुक्र06:5507:53दिन
बुध07:5308:52दिन
चंद्र08:5209:51दिन
शनि09:5110:50दिन
गुरु10:5011:48दिन
मंगल11:4812:47दिन
सूर्य12:4713:46दिन
शुक्र13:4614:44दिन
बुध14:4415:43दिन
चंद्र15:4316:42दिन
शनि16:4217:41दिन
गुरु17:4118:42रात
मंगल18:4219:43रात
सूर्य19:4320:45रात
शुक्र20:4521:46रात
बुध21:4622:47रात
चंद्र22:4723:49रात
शनि23:4900:50रात
गुरु00:5001:51रात
मंगल01:5102:53रात
सूर्य02:5303:54रात
शुक्र03:5404:55रात
बुध04:5505:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2729° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।