27 नवंबर 2029 को अयोध्या का पंचांग

मंगलवार, 27 नवंबर 2029, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 27 नवंबर 2029 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (18:09 तक), नक्षत्र आश्लेषा (06:26, 28 नव॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:29 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 14:28 से 15:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:29 – 17:07
रात 06:30 तक
तिथि
षष्ठी, 18:09 तक
सप्तमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 06:26 तक
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 नवंबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 18:09 तक
कृष्ण सप्तमी 17:44, 28 नव॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 06:26, 28 नव॰ तक
मघा 06:19, 29 नव॰ तक
योग
ब्रह्म 16:04 तक
इंद्र 14:37, 28 नव॰ तक
करण
वणिज 18:09 तक
विष्टि (भद्रा) 06:01, 28 नव॰ तक
बव 17:44, 28 नव॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 06:26, 28 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:29
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
22:36
चंद्रास्त
11:01
दिनमान
10h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:36
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:09

अशुभ समय

राहुकाल
14:28 – 15:47
यमगंड
09:09 – 10:28
गुलिक काल
11:48 – 13:08

27 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:29 – 07:49टालें
उद्वेग07:49 – 09:09टालें
चर09:09 – 10:28सामान्य
लाभ10:28 – 11:48शुभ
अमृत11:48 – 13:08शुभ
काल13:08 – 14:28टालें
शुभ14:28 – 15:47शुभ
रोग15:47 – 17:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:07 – 18:48टालें
लाभ18:48 – 20:28शुभ
उद्वेग20:28 – 22:08टालें
शुभ22:08 – 23:49शुभ
अमृत23:49 – 01:29शुभ
चर01:29 – 03:09सामान्य
रोग03:09 – 04:50टालें
काल04:50 – 06:30टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:2907:22दिन
सूर्य07:2208:16दिन
शुक्र08:1609:09दिन
बुध09:0910:02दिन
चंद्र10:0210:55दिन
शनि10:5511:48दिन
गुरु11:4812:41दिन
मंगल12:4113:35दिन
सूर्य13:3514:28दिन
शुक्र14:2815:21दिन
बुध15:2116:14दिन
चंद्र16:1417:07दिन
शनि17:0718:14रात
गुरु18:1419:21रात
मंगल19:2120:28रात
सूर्य20:2821:35रात
शुक्र21:3522:42रात
बुध22:4223:49रात
चंद्र23:4900:55रात
शनि00:5502:02रात
गुरु02:0203:09रात
मंगल03:0904:16रात
सूर्य04:1605:23रात
शुक्र05:2306:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2748° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।