5 दिसंबर 2029 को अयोध्या का पंचांग

बुधवार, 5 दिसंबर 2029, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 5 दिसंबर 2029 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (20:22 तक), नक्षत्र अनुराधा (15:51 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 11:51 से 13:10 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 17:07
रात 06:36 तक
तिथि
अमावस्या, 20:22 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
अनुराधा, 15:51 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 20:22 तक
शुक्ल प्रतिपदा 17:11, 6 दिस॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 13:21, 6 दिस॰ तक
योग
सुकर्मा 11:55 तक
धृति 08:00, 6 दिस॰ तक
करण
चतुष्पद 10:03 तक
नाग 20:22 तक
किंस्तुघ्न 06:44, 6 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
06:05
चंद्रास्त
16:50
दिनमान
10h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:30 – 12:12 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:51 – 13:10
यमगंड
07:54 – 09:13
गुलिक काल
10:32 – 11:51

5 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:35 – 07:54शुभ
अमृत07:54 – 09:13शुभ
काल09:13 – 10:32टालें
शुभ10:32 – 11:51शुभ
रोग11:51 – 13:10टालें
उद्वेग13:10 – 14:29टालें
चर14:29 – 15:48सामान्य
लाभ15:48 – 17:07शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:07 – 18:48टालें
शुभ18:48 – 20:30शुभ
अमृत20:30 – 22:11शुभ
चर22:11 – 23:52सामान्य
रोग23:52 – 01:33टालें
काल01:33 – 03:14टालें
लाभ03:14 – 04:55शुभ
उद्वेग04:55 – 06:36टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3507:28दिन
चंद्र07:2808:20दिन
शनि08:2009:13दिन
गुरु09:1310:06दिन
मंगल10:0610:59दिन
सूर्य10:5911:51दिन
शुक्र11:5112:44दिन
बुध12:4413:37दिन
चंद्र13:3714:29दिन
शनि14:2915:22दिन
गुरु15:2216:15दिन
मंगल16:1517:07दिन
सूर्य17:0718:15रात
शुक्र18:1519:22रात
बुध19:2220:30रात
चंद्र20:3021:37रात
शनि21:3722:44रात
गुरु22:4423:52रात
मंगल23:5200:59रात
सूर्य00:5902:06रात
शुक्र02:0603:14रात
बुध03:1404:21रात
चंद्र04:2105:28रात
शनि05:2806:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां अयोध्या में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2751° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।